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    बठिंडा में फर्जी वेतन पर्चियों से बैंक को 1.47 करोड़ की चपत, 10 खातों के खेल ने खोली करोड़ों की ठगी की परत

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 02:37 PM (IST)

    फर्जी वेतन पर्चियों और जाली दस्तावेजों के जरिए 10 खातों से 1.47 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर कराने के आरोप में तीन लोगों पर मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने बैं ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    HighLights

    1. बठिंडा में सरकारी बैंक से 1.47 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी।

    2. फर्जी वेतन पर्चियों और जाली दस्तावेजों से ऋण लिया गया।

    3. तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने जांच शुरू की।

    जागरण संवाददाता, बठिंडा। बठिंडा में एक सरकारी बैंक के साथ कथित तौर पर 1.47 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी वेतन पर्चियों और अन्य जाली दस्तावेजों के सहारे 10 अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का ऋण मंजूर कराया गया। मामले का खुलासा होने के बाद बैंक प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

    जानकारी के अनुसार सरकारी बैंक की कैंट शाखा की मुख्य प्रबंधक श्वेता सिंगला ने पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि तीनों नामजद आरोपितों ने आपसी मिलीभगत से एक सुनियोजित योजना के तहत 10 व्यक्तियों के बैंक खातों का उपयोग किया। इन खातों के आधार पर कथित तौर पर फर्जी वेतन पर्चियां और अन्य जाली दस्तावेज तैयार कर बैंक में जमा किए गए।

    इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत कराया गया, जिससे बैंक को करीब 1.47 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। पुलिस के अनुसार इस मामले में होशियारपुर जिले के गांव मनहोता निवासी हरविंदर सिंह, गिद्दड़बाहा के दशमेश नगर निवासी सुरिंदर कुमार तथा बठिंडा की कमला नेहरू कालोनी निवासी रविंदर सिंह को नामजद किया गया है।

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    फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया ऋण

    आरोप है कि तीनों ने मिलकर बैंक अधिकारियों को गुमराह किया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत करवाने में भूमिका निभाई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया है कि जांच के दौरान संबंधित खाताधारकों की फर्जी वेतन पर्चियां और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इन दस्तावेजों की जांच के आधार पर यह स्पष्ट किया जाएगा कि जालसाजी किस स्तर तक हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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    पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दस्तावेजों की फोरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जाली दस्तावेज किस प्रकार तैयार किए गए और उन्हें बैंक में किस माध्यम से प्रस्तुत किया गया।

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    पुलिस ने जांच की शुरू

    मामले की जांच कर रहे सहायक उपनिरीक्षक दीवान चंद ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसे भी मामले में शामिल किया जाएगा और उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अब ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, संबंधित खातों के लेनदेन और दस्तावेजों की सत्यता की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या यह केवल तीन लोगों तक सीमित मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय था। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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