पूर्व सीएम चन्नी के बहाने पंजाब में कांग्रेस का अनुशासन संदेश, राहुल-प्रियंका ने बनाई दूरी!
संसद के दौरान सामने आए दो घटनाक्रमों के बाद पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि पार्टी ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया ...और पढ़ें

पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी व राहुल गांधी।
HighLights
संसद में राहुल-प्रियंका से चन्नी की दिखी दूरी।
कांग्रेस पंजाब में संगठनात्मक अनुशासन का संदेश दे रही।
व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर सामूहिक नेतृत्व पर जोर।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े दो घटनाक्रमों ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। संसद परिसर में वायरल हुए वीडियो में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत करते दिखाई दिए, जबकि चन्नी कुछ दूरी पर अकेले खड़े नजर आए।
इसके बाद युवाओं के मुद्दों और पेपर लीक के विरोध में संसद से निकाले गए मार्च के दौरान भी चन्नी को कोई अलग राजनीतिक तवज्जो मिलती नहीं दिखी। इन घटनाओं के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस नेतृत्व पंजाब इकाई को संगठनात्मक अनुशासन का संदेश देना चाहता है। हालांकि कांग्रेस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
यह भी पढ़ें- 'इस्तीफे से शिक्षा सुधरेगी तो आज ही पद छोड़ दूं', विपक्ष के हमलों पर पंजाब के मंत्री हरजोत बैंस का पलटवार
पार्टी का निर्णय अहम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर व्यक्तिगत राजनीतिक लाइन सामने आती रही है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व यह स्पष्ट संकेत देना चाहता है कि पार्टी में व्यक्तिगत छवि से अधिक संगठन का फैसला और सामूहिक नेतृत्व अहम होगा। चर्चा यह भी है कि अब हर नेता को पार्टी की तय रणनीति के अनुरूप ही आगे बढ़ना होगा और सार्वजनिक रूप से अलग राजनीतिक लाइन लेने की गुंजाइश कम होगी।
पंजाब का दलित चेहरा हैं चन्नी
चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब कांग्रेस के सबसे बड़े दलित चेहरों में गिने जाते हैं। 2021 में कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर उन्हें राज्य का पहला दलित मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
खबरें और भी
इसके बाद प्रदेश संगठन में नेतृत्व को लेकर लगातार बदलाव हुए और अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रहीं। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अब सुखजिंदर सिंह रंधावा की जिम्मेदारी के बीच भी कई बार संगठनात्मक खींचतान की खबरें चर्चा में रहीं।
यह भी पढ़ें- पंजाबी फिल्मों के अभिनेता रब्बी कंडोली जुड़े वारिस पंजाब दे के साथ, थामा अमृतपाल सिंह की पार्टी का दामन
पार्टी के अन्य नेताओं को भी संदेश
संसद से सामने आया घटनाक्रम केवल चन्नी तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे पंजाब कांग्रेस के सभी नेताओं के लिए एक व्यापक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव की तैयारियों से पहले पार्टी किसी भी तरह की सार्वजनिक गुटबाजी या समानांतर शक्ति केंद्र की छवि बनने नहीं देना चाहती। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सभी नेता एकजुट होकर केंद्रीय रणनीति के अनुरूप काम करें।
वायरल वीडियो पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
हाल के महीनों में चन्नी के कुछ बयानों और राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी पार्टी के भीतर अलग-अलग तरह की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में राजनीतिक हलकों का मानना है कि संसद में सामने आई तस्वीरों ने इन अटकलों को और हवा दी है। हालांकि यह भी सच है कि कांग्रेस ने न तो वायरल वीडियो पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है और न ही यह स्वीकार किया है कि किसी नेता को कोई विशेष राजनीतिक संदेश दिया गया।
इसलिए इन घटनाओं को फिलहाल राजनीतिक विश्लेषण और पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में ही देखा जा रहा है। आने वाले समय में पंजाब कांग्रेस में नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक गतिविधियां इस बात का संकेत देंगी कि मौजूदा चर्चाएं कितनी सही साबित होती हैं।