जागरण विमर्श कार्यक्रम में पहुंचे सीएम मान; बोले- मुफ्त सेवाएं जारी रहेंगी, पंजाब के साथ भेदभाव पर भड़के
चंडीगढ़ में आयोजित जागरण विमर्श के मंच कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वह पहले कलाकार के रूप में सिस्टम पर चोट करते थे, अब उसे बदल ...और पढ़ें

चंडीगढ़ में जागरण विमर्श कार्यक्रम के दौरान सीएम भगवंत मान, पंजाब-चंडीगढ़ के स्थानीय संपादक अमित शर्मा,पंजाब जागरण के सीजीएम मोहिंदर गुप्ता व पंजाबी जागरण के संपादक इन्द्रप्रीत सिंह।
HighLights
कलाकार से मुख्यमंत्री बनकर सिस्टम बदल रहे हैं मान।
गरीबों के लिए मुफ्त योजनाएं जारी रहेंगी, केंद्र पर भेदभाव का आरोप।
फसली बीमा योजना को बताया फ्लॉप, पराली समस्या पर भी बोले।
कैलाश नाथ, चंडीगढ़। देश की राजनीति में भगवंत मान एक मात्र एसे मुख्यमंत्री हैं जो स्टेज से लेकर स्टेट तक को लीड कर रहे हैं। बतौर कलाकार मुख्यमंत्री भगवंत मान की ताकत ‘पॉलिटिकल सटायर’ हुआ करती थी। जो राजनीतिक सिस्टम पर चोट करती थी। 2022 में भगवंत मान मुख्यमंत्री बने तो उनके हाथों में हरा कलम आ गया।
चंडीगढ़ में आयोजित जागरण विमर्श कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री भगवंत मान कहते हैं-
बतौर कलाकार मैं अपने शब्दों से सिस्टम पर चोट करता था। लोगों ने हाथों में हरा कलम जब से थमाया है। तब से मैं सिस्टम को बदल रहा हूं। ताकि सिस्टम में सुधार हो। विचार मंच के दौरान ‘चुनौतियां और राह’ पर बोलते हुए भगवंत मान ने कहा कि 70 साल का घाटा चार वर्षों में पूरा नहीं किया जा सकता।
आम आदमी पार्टी ने भले ही चुनाव में लोगों से किए गए गारंटियों को पूरा कर दिया हो लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इस दौरान उन्होंने न अपने निजी जीवन से लेकर पंजाब के राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर खुल कर विचार रखे।
यह भी पढ़ें- धमाके से दहला अबोहर, घर की छत व दुकानों के शटर उड़े; तीन गंभीर घायलों को किया गया रेफर

जागरण विमर्श कार्यक्रम के दौरान सीएम भगवंत मान के साथ दैनिक जागरण पंजाब के सीजीएम मोहिंदर गुप्ता व पंजाब-चंडीगढ़ के स्थानीय संपादक अमित शर्मा।
गरीबों को मिलने वाली मुफ्त सेवाएं जारी रहेंगी
जागरण के कार्यक्रम में मु्ख्यमंत्री मान ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने 300 यूनिट फ्री बिजली का वायदा किया तो कहा गया कि ‘रेवड़ियां’ बांट रहे हैं। उन्होंने कहा ‘फिर 15 लाख का पापड़ पहले किसने बेचा था। अब कह रहे हैं कि जुमला था। नेताओं का तो टोल भी फ्री है और गाड़ी भी। तेल भी फ्री हैं जो टेलीफोन का बिल भी। जब गरीबों को बिजली, राशन, ईलाज, बस सफर मिलता हैं तो इन नेताओं को दर्द क्यों होता है।
गरीब आदमी भले ही डायरेक्ट टैक्स नहीं देता लेकिन इन डायरेक्ट टैक्स तो देता ही है। गरीब आदमी के चाय से लेकर रात को सोते समय चलने वाले पंखे पर भी टैक्स है।’ उन्होंने कहा कि अंबानियों का जब कर्जा माफ हो जाता हैं तो गरीबों को सहूलियत क्यों नहीं दिया जा सकता है।
खबरें और भी
यह योजनाएं बंद नहीं होगी। क्योंकि जब आम लोगों को यह भरोसा हो जाए कि उसके द्वारा दिए जाने वाला इन-डायरेक्ट का लाभ उन्हें ही मिलेगा तो उन्हें टैक्स देने का दुख नहीं होता।
भेदभाव- बस चले तो राष्ट्रीय गान से पंजाब का नाम हटा दें
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता हैं। क्योंकि पंजाब के किसानों ने दिल्ली में धरना देकर तीन काले कानून वापस करवाए। केंद्र ने पंजाब के 9000 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास फंड रोका हुआ है।
उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर वेब-सिरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसें भी यही दिखाया गया हैं कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना हैं कि वेब सिरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।
मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा कि अगर इनका बस चले तो जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें उत्तर प्रदेश फिट कर लें। भगवंत मान ने कहा पंजाब में फसलें खराब हुई लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई। जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।
यह भी पढ़ें- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, मोबाइल फोन न मिलने पर दी चेतावनी; संघर्ष तेज करने का ऐलान

जागरण विमर्श कार्यक्रम में लोगों से मुलाकात करते हुए सीएम भगवंत मान।
फसल बीमा योजना फ्लाप
पिछले वर्ष आई बाढ़ और अप्रैल माह में हुई बारिश व ओलावृष्टि के कारण खराब हुई फसल के बाद विपक्षी पार्टियों द्वारा फसली बीमा का मुद्दा उठाने को लेकर उठे सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा ‘यह योजना फ्लाप है। जिन राज्यों में फसली बीमा लागू हैं वहां पर जाकर किसानों से पूछे तो पता चल जाएगा कि उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन बीमा बेचना होता हैं तो कंपनी कई प्रकार के वायदे करती हैं लेकिन बाद में मुकर जाती है। अपने एक दोस्त का उद्हारण देते हुए कहा कि वह अपने बेटे के जीवन बीमा का कवर लेने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में फसल खराबे की सबसे अच्छी भरपाई आम आदमी पार्टी ने की है।
बाढ़ के कारण फसलों को नुकसान हुआ तो पंजाब सरकार ने देश में सबसे अधिक 20,000 रुपये प्रति एकड़ की भरपाई की। बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान की भी गिरदावरी हो चुकी है। किसानों की भरपाई की जाएगी।
फसली विविधिकरण संभव नहीं, धान होगा तो पराली भी होगी
किसानों को पारंपरिक खेती से मुक्ति दिलवाने के उठ रहे सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञापन देने मात्र से फसली चक्र नहीं टूटने वाला है। इसके लिए किसानों को बदली हुई फसल का मूल्य देना होगा। दीवारों पर हमने बहुत लिखा कि ‘हम दो हमारे दो’ तो इससे क्या जनसंख्या नियंत्रित हो गई। पराली में लगने वाली आग के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि असली कारण को समझना ही होगा।
अक्टूबर-नवंबर में दशहरा-दीपावली और दशहरा एक साथ आते हैं। किसान धान की पराली में इसलिए आग लगाता हैं क्योंकि उसे 10 से 12 दिन के भीतर गेहूं की फसल लगानी होती है। जब पंजाब 185 लाख मिट्रिक टन धान सेंट्रल पूल में देता हैं तो पंजाब बहुत अच्छा लेकिन इसके साथ पराली भी तो होगी। जब किसान पराली जलाते हैं तो कहा जाता हैं कि किसानों पर पर्चा दर्ज कर दो।
10 दिन में अन्नदाता से अपराधी बने किसान
दस दिन पहले जो किसान अन्नदाता होता हैं 10 दिन बाद ही वह अपराधी बन जाता है। किसानों को पराली संभालने का इंसेंटिव देना होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में पराली जलती भी नहीं हैं कि दिल्ली में हंगामा शुरू हो जाता है। एनजीटी के सेवानिवृत्त जज ने भी स्पष्ट किया कि पंजाब को यूं ही बदनाम किया जाता है।
पंजाब के धुएं से दिल्ली को असर नहीं पड़ता। लेकिन जज साहब ने यह बात तब कहीं जब वह सेवानिवृत्त हो गए। सर्विंग में होते हुए उन्होंने यह बात नहीं कहीं। मुख्यमंत्री ने मार्डन खेती पर विशेष जोर दिया।
पंजाब के छात्र जमीन पर नहीं बैठते
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। स्कूल ऑफ एमिनेंस तो बने ही हैं साथ ही पंजाब का अब कोई भी ऐसा स्कूल नहीं हैं जहां पर बच्चे जमीन पर पढ़ते हो। कोई स्कूल ऐसा नहीं हैं जो बिना चाहरदिवारी के हो। स्कूलों में लैब बने हैं और सकरारी स्कूल के बच्चे जेईई और नीट की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह वहीं स्कूल जहां दो-तीन साल पहले तक बच्चों को जेईई और नीट के बारे में पता तक नहीं था।
ड्रग्स को लेकर पंजाब बदनाम किया जा रहा
ड्रग्स के मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, बदनाम तो पंजाब को किसा जाता हैं लेकिन 3000 किलों ड्रग्स मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी जाती है। पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ मुहीम चला रही है। वहीं, नए इनोवेशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब प्रति दिन 15 मौतें सड़कों पर हो रही थी।
लोग इसे कुदरती आपदा मानते थे लेकिन यह मानवीय आपदा थी। मुख्यमंत्री ने कहा जब मैंने सड़क सुरक्षा फोर्स का गठन किया तो सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में कमी आई। आज प्रति वर्ष 2600 कीमती जानें बचाई जा रही है।
मोहम्मद सदीक ने जांची थी मान की ईमानदारी
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने जीवन का एक अनोखा वाक्या सांझा करते हुए कहा ‘बात उन दिनों की हैं जब मैं काॅलेज में पढ़ता था और सप्ताह में तीन दिन मशहूर पंजाबी गायक मोहम्मद सदीक का स्टेज संभालता था। 1990 के दौर में मो. सदीक अपने पीक पर थे। उनके एक दिन में तीन से पांच प्रोग्राम होते थे। मेरा काम मो. सदीक साहब को स्टेज पर प्रस्तुत करना और बाद में लोग जो पैसे देते थे।
पैसे मिलते उसे इकट्ठा करके झोले में रखने का होता था। मुझे 100 रुपया प्रति प्रोग्राम मिला करता था।’ मुख्यमंत्री ने कहा मो. सदीक साहब के बाद मारुति कार हुआ करती थी। एक बार प्रोग्राम करके आ रहे थे। मो. सदीक साहब को मुझे पैसे देने थे। गाड़ी से उतरते हुए उन्होंने मुझे पैसे दिए और मैं वापस धुरी आ गया। घर आकर देखा तो छह नोट 100 के नहीं बल्कि 500-500 के थे।
मुझे लगा कि गलती से शायद मो. सदीक ने 100 की बजाए 500 के नोट दे दिए। उस दिनों लैंड लाइन होते थे। मैने मो. सदीक साहब को फोन लगाया तो सामने से जवाब आया की मुझे पता था कि तुम्हारा फोन आएगा। मैंने कहा कि गलती से आपने मुझे 500 के नोट दे दिए हैं। तो उन्होंने कहा, मैंने तुम्हारी तनख्वाह बढ़ा दी हैं। क्योंकि जब तुम स्टेज संभालते हो तो झोले में 10,000 रुपये आते हैं।
जब तुम नहीं होते तो 5,000 रुपये ही आते हैं। उस समय मो. सदीक साहब ने कहा, अपनी ईमानदारी को बनाए रखना। बहुत आगे तक जाऊंगो। मुख्यमंत्री ने कहा, झोले में तो पहले भी 10,000 के करीब पैसा आता था लेकिन जो लोग इकट्ठा करते थे वह टांका लगा देते थे।
पंजाब से हमेशा भेदभाव हुआ
मुख्यमंत्री ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र पंजाब के साथ हमेशा ही भेदभाव करता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफार्म पर आई वेब सीरीज महारानी-4 का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भी यही दिखाया गया है कि किस प्रकार से प्रधानमंत्री दूसरी पार्टी की सरकारों की बाह मरोड़ते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वेब सीरीज में बिहार है और यहां पर पंजाब है।
सीएम ने कहा कि अगर इनका बस चले तो राष्ट्रगान जन-गण-मन से पंजाब का नाम हटाकर उसमें यूपी फिट कर लें। खराब मौसम से पंजाब में फसलें खराब हुईं लेकिन सबसे पहले छूट राजस्थान को और उसके बाद हरियाणा को दी गई, जबकि सबसे ज्यादा अन्न पंजाब उपजाता है।

कार्यक्रम के दौरान मौजूद स्थानीय लोग।
पिता रेडियो पर कमेंट्री सुनते थे, वहीं से शौक हुआ
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, मेरे पिता जी को खेल बहुत पसंद था। वह जब भी हाकी मैच की कमेंट्री सुनते तो मुझे भी पास बैठा लेते थे। वहीं से खेल के प्रति मेरा रुझान शुरू हुआ। 1988 में मेरे गांव में पहला ब्लैक एंड व्हाइट टीवी आया वो भी मेरे घर पर। उस समय ओलंपिक चल रहे थे। तब पहली बार मैंने टेनिस देखना शुरू किया। स्टेफीग्राफ, मार्टिनी नवरातिलोवा, बोरिस बेकर, जान मैकेनरो उस समय स्टार प्लेयर हुआ करते थे।
पंजाब के अंतिम छोर तक पहुंचा नहरी पानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 में सरकार संभालने के बाद उन्होंने पंजाब के लोगों से वादा किया था कि वह पंजाब के अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंचाएंगे, क्योंकि नहरी पानी में मिनरल्स होते हैं जो फसल के लिए अच्छे होते हैं। पहले हम 21 फीसद नहरी पानी का प्रयोग कर रहे थे, जोकि अब 74 फीसद हो चुका है। अगर इसे क्यूसिक के हिसाब से देखे तो चार वर्षों में 11,000 क्यूसिक अतिरिक्त पानी खेतों तक पहुंचा।
इसका मतलब है कि भाखड़ा नहर के बराबर पानी। इसका असर भी देखने को मिला। पंजाब में 12 ब्लाकों में पहली बार जलस्तर बढ़ गया। जब नहरी पानी खेतों में जाएगा तो किसान को ट्यूबवेल नहीं चलाना पड़ेगा। इससे भूजल भी बचेगा। पिछली सरकारों ने कभी इस पर ध्यान ही नहीं दिया। पहले तो एसी कमरों में बैठकर ही फैसले हो जाते थे। मैं जब वहां गया तो दिक्कत देखी और यह फैसला लिया।
केंद्र से काम करवाना नहीं आसान
मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार को कृषि कानून वापस लेने का अब भी मलाल है। इसकी टीस भाजपा को हमेशा रहती है और इसी कारण वह पंजाब के लोगों की आवाज दबाने का प्रयास करती रहती है। इस सरकार से कोई काम निकलवाने के लिए उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है।
हमें भी पता है कि सीधी उंगली से घी नहीं निकलने वाला, इसलिए हमने तो पूरा पंजा ही टेढ़ा किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की राह में कदम-कदम पर केंद्र सरकार बाधाएं खड़ी करती है। ग्रामीण विकास फंड का नौ हजार करोड़ रुपये अभी तक रोक रखा है।
अन्य फंड जारी करने में भी अड़चनें डाली जाती हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उड़ीसा से कोयला पंजाब लाने के लिए कहा गया कि वाया श्रीलंका, मुंद्रा पोर्ट लेकर आओ, लेकिन जब हमने यह मामला अपने तरीके से तत्कालीन कोयला मंत्री आरके सिंह के समक्ष उठाया तो उन्होंने अपना आदेश वापस लिया।