पंजाब में BJP का बड़ा चुनावी दांव! 15 सितंबर से शुरू होगी नशा विरोधी यात्रा, शाह भी होंगे शामिल
भाजपा 15 सितंबर से पंजाब में नशे के खिलाफ रैलियां शुरू करेगी। अभियान को चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। गठबंधन विकल्पों पर पार्टी में मंथन जारी है।

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HighLights
भाजपा 15 सितंबर से पंजाब में नशा विरोधी रैलियां शुरू करेगी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समापन कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं।
पार्टी में गठबंधन विकल्पों पर भी महत्वपूर्ण चर्चा जारी है।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा अब नशे के मुद्दे को लेकर मैदान में उतरने की तैयारी में है। पार्टी 15 सितंबर से प्रदेशभर में नशा विरोधी रैलियां शुरू करने जा रही है। भाजपा के लिए यह अभियान केवल नशे के खिलाफ जनजागरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश में चुनावी बिगुल के तौर पर भी देखा जा रहा है।
पार्टी की योजना नशे के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने के साथ-साथ इसे चुनावी अभियान का प्रमुख मुद्दा बनाने की है। भाजपा के पदाधिकारियों के मुताबिक, इन रैलियों के समापन कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ केंद्रीय नेता पहुंच सकते हैं। रैलियों के कार्यक्रम और इसकी रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को भाजपा की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है।
इसमें नशे के खिलाफ अभियान के साथ प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगामी चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है। बैठक में इस बात को लेकर चर्चा की जाएगी की नशे के खिलाफ रैलियां की शुरुआत कहां से की जानी है और क्या रूट रहेगा।
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गठबंधन को लेकर कार्यकर्ताओं की राय भी जानी
इसी बीच भाजपा के भीतर संभावित गठबंधन को लेकर भी मंथन तेज हो गया है। सोमवार को पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की बैठक में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से गठबंधन को लेकर राय ली गई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने शिरोमणि अकाली दल के साथ दोबारा गठबंधन नहीं करने के पक्ष में राय दी। कार्यकर्ताओं का तर्क था कि पार्टी को आगामी चुनाव अपने दम पर मजबूत तरीके से लड़ने की तैयारी करनी चाहिए।
हालांकि, गठबंधन के विकल्पों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। बैठक में बहुजन समाज पार्टी, अकाली दल (वारिस पंजाब दे), पूर्ण सरजीत सहित अन्य राजनीतिक दलों के साथ संभावित तालमेल के विकल्पों पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा सभी राजनीतिक विकल्प खुले रखकर आगे बढ़ेगी और अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति के आधार पर होगा।
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अकाली दल से गठबंधन की चर्चा पहले भी
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में चर्चा चलती रही है। दोनों दल लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के साथी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े। हाल के महीनों में दोनों दलों के बीच फिर से संभावित नजदीकी को लेकर अटकलें तेज हुई हैं, लेकिन भाजपा के भीतर इस मुद्दे पर एकराय नहीं दिख रही है।
अब भाजपा का नशा विरोधी अभियान इस राजनीतिक समीकरण के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 15 सितंबर से शुरू होने वाली रैलियों के जरिए पार्टी जहां जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाएगी, वहीं नशे के मुद्दे को लेकर सीधे जनता के बीच जाने की तैयारी में है। मंगलवार की कोर कमेटी की बैठक के बाद अभियान और आगामी राजनीतिक रणनीति की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
