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    पंजाब में 2 साल में बढ़ीं केंद्रीय एजेंसियों की दस्तक, नेताओं से लेकर गैंगस्टरों तक कई नाम जांच के घेरे में

    Updated: Fri, 15 May 2026 04:27 PM (IST)

    पंजाब में पिछले दो वर्षों के दौरान केंद्रीय एजेंसियों ने आतंकवाद, गैंगस्टर नेटवर्क, नशा तस्करी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में बड़े स्तर पर कार्रवाई ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. एनआईए ने आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ पर की बड़ी कार्रवाई।

    2. ईडी, सीबीआई ने मंत्रियों के भ्रष्टाचार मामलों की जांच की।

    3. नशीली दवाओं की तस्करी, नार्को-टेरर मॉड्यूल पर ध्यान।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पिछले करीब दो वर्षों में पंजाब में केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) और सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने राज्य में आतंकवादी गतिविधियों, गैंगस्टर नेटवर्क, नशीली दवाओं की तस्करी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कई बड़ी कार्रवाई की हैं।

    आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ के खिलाफ एनआईए की कार्रवाई सबसे प्रमुख रही है। एनआईए ने वर्ष 2024 से 2026 अब तक के दौरान बठिंडा, मुक्तसर, मोगा, फिरोजपुर, अमृतसर समेत कई जिलों में 100 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई। यह कार्रवाई कथित तौर पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई), खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) और विदेश में बैठे हैंडलरों से जुड़े नेटवर्क पर केंद्रित रही।

    एजेंसी के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कुछ स्थानीय गैंगस्टर समूह इन संगठनों के लिए हथियारों की सप्लाई, फंडिंग और शरण उपलब्ध कराने में शामिल थे। इसके अलावा अमृतसर और जालंधर में हुए ग्रेनेड हमलों के मामलों में भी एनआईए की जांच जारी रही। एजेंसी ने इन घटनाओं को सीमा पार से संचालित माड्यूल से जुड़ा बताया।

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    नशा तस्करी व फंडिंग तक फोकस

    नशीली दवाओं की तस्करी और उससे जुड़ी फंडिंग भी केंद्रीय एजेंसियों के लिए बड़ा फोकस रही। एनआईए ने कई मामलों में यह दावा किया कि ड्रग्स तस्करी से अर्जित धन का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क को वित्तीय सहायता देने में किया जा रहा था। एजेंसी ने इसे ‘नार्को-टेरर’ माड्यूल बताया गया है।
    दूसरी ओर, ईडी और सीबीआई ने पंजाब में भ्रष्टाचार के मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

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    करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा मामलों में मौजूदा और पूर्व मंत्रियों वह चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी से हो उन पर सीबीआई और ईडी की ओर से कार्रवाई की गई है। इनमें से कई मामले अदालत में विचाराधीन दिन है। 2026 में सीबीआई ने मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो मुख्यालय में छापेमारी की। एजेंसी के अनुसार, 25 लाख रुपये की कथित रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में तीन बिचौलियों को गिरफ्तार किया गया।

    डीआईजी भुल्लर के खिलाफ कार्रवाई

    अक्टूबर 2025 में सीबीआई ने पंजाब पुलिस के तत्कालीन डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान नकदी, हथियार और महंगी घड़ियां बरामद हुई थीं।

    इसी तरह भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) पंजाब क्षेत्र में उप-मानक चावल स्वीकार करने के मामले में सीबीआई ने अधिकारियों और राइस मिलरों के खिलाफ कार्रवाई की। इस मामले की जानकारी सीबीआई की चार्जशीट और अदालत के फैसले से सामने आई।

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    पूर्व-वर्तमान नेताओं पर नजर

    आम आदमी पार्टी सरकार के कैबिनेट मंत्री समेत पूर्व सरकारों के कई मंत्री और नेता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के दायरे में हैं। अलग-अलग मामलों में इन नेताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच, पूछताछ और छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है।

    मौजूदा सरकार में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा का नाम हाल में चर्चा में रहा है। ईडी ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में उनसे संबंधित जांच शुरू की है। इसके साथ ही आप के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल भी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) से जुड़े मामले में एजेंसी की जांच के दायरे में हैं।

    पूर्व कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में साधु सिंह धर्मसोत और संगत सिंह गिलजियां से जुड़े मामलों की भी ईडी जांच कर रही है। दोनों पूर्व वन मंत्रियों के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी बहुचर्चित ड्रग्स मामले में ईडी जांच के घेरे में हैं।

    पूर्व मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर के खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत जांच चल रही है।केंद्रीय एजेंसियों की इन लगातार कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि पंजाब में सुरक्षा, नशा तस्करी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार तीनों मोर्चों पर निगरानी बढ़ी है। सीमा राज्य होने के कारण पंजाब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है।

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