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    लुधियाना में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों का गिरोह पकड़ा, 132 लोग अरेस्ट; नकली तकनीकी सहायता बनकर करते थे ठगी

    Updated: Fri, 15 May 2026 03:26 PM (GMT+05:30)

    लुधियाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 132 आरोपित गिरफ्तार किए हैं। कार्रवाई में करोड़ों नकदी, लैपटॉप, मोबाइल और वाहन बर ...और पढ़ें

    लुधियाना पकड़े गए ठग अपना मुंह छिपाते हुए।- फोटो अजय शर्मा

    लुधियाना पकड़े गए ठग अपना मुंह छिपाते हुए।- फोटो अजय शर्मा

    HighLights

    1. लुधियाना पुलिस ने 132 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया।

    2. गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाता था।

    3. करोड़ों रुपये नकद, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद।

    जागरण संवाददाता, लुधियाना। पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 132 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अब तक के सबसे बड़े साइबर अपराध मामलों में से एक माना जा रहा है। पुलिस कमिश्नरेट लुधियाना की ओर से साइबर अपराध थाना में मामला दर्ज किया गया है। 

    जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक फैला हुआ था तथा विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर बड़े स्तर पर ठगी की जा रही थी। 

    यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है। पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ छापेमारी कर कई अवैध कॉल केंद्रों का भंडाफोड़ किया।

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    लुधियाना पुलिस कमिश्नर आईपीएस स्वपन शर्मा पकड़े गए ठगों से बातचीत करते हुए।- फोटो अजय शर्मा

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    1 करोड़ की राशि रिकवर

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब एक करोड़ सात लाख रुपये नकद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 वाहन बरामद किए हैं। इसके अलावा 300 से अधिक बैंक खाते भी फ्रीज किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह विदेशी नागरिकों को नकली संदेश और वायरस अलर्ट दिखाकर डराता था।

    जानें कैसे डराते थे लोगों को

    संदेश के बाद स्क्रीन पर खुद को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का तकनीकी सहायता केंद्र बताकर सहायता नंबर दिखाया जाता था। जैसे ही पीड़ित संपर्क करता, उसे इंटरनेट आधारित प्रणाली के जरिए ठगों से जोड़ दिया जाता था।

    इसके बाद आरोपित पीड़ितों से एक विशेष सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाकर उनके संगणक और बैंक संबंधी जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। गिरोह के सदस्य कई बार खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को यह कहकर डराते थे कि उनका खाता खतरे में है। फिर अलग-अलग तरीकों से उनसे पैसे ऐंठे जाते थे।

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    गिरोह के सदस्य खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे कि उनका बैंक खाता असुरक्षित है। इसके बाद उनसे कई तरीकों से पैसे ऐंठे जाते थे, जिनमें—

    • घर से नकदी उठवाना
    • सोना खरीदवाकर उसकी डोरस्टेप पिकअप
    • अमेजन और एप्पल गिफ्ट कार्ड खरीदवाना
    • फर्जी विदेशी खातों में वायर ट्रांसफर करवाना

    पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध माध्यमों से भारत पहुंचाई जाती थी।

    हर एक दिन में 8 से 10 कॉल संभालता था

    प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह का हर संचालक प्रतिदिन आठ से दस कॉल संभालता था। कर्मचारियों को तय वेतन के साथ प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त भुगतान भी दिया जाता था।

    लुधियाना पुलिस ने कहा कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, हवाला नेटवर्क और अन्य आरोपितों की पहचान को लेकर जांच अभी जारी है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठित साइबर अपराध और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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