शाह से मुलाकात पर रंधावा ने तोड़ी चुप्पी, बोले- पंजाब की सुरक्षा पर रखी चिंता; चन्नी की बैठक के सवाल पर साधा मौन
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा कि चर्चा केवल पंजाब के सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा और कानून ...और पढ़ें

गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सुखजिंदर रंधावा।
HighLights
रंधावा ने अमित शाह से मुलाकात पर स्पष्टीकरण दिया।
मुलाकात का उद्देश्य पंजाब की सीमा सुरक्षा था।
आतंकवाद, गैंगस्टर गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की गई।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल के बाद जारी राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में हुई मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने समर्थक नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रंधावा की गृह मंत्री से मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक कयास लगाए जाने लगे।
हालांकि, रंधावा ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात का उद्देश्य केवल पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर चर्चा करना था। गृह मंत्री से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए रंधावा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, वह उसी का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मुलाकात को किसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
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चन्नी की बुलाई बैठक पर साधी चुप्पी
चन्नी की ओर से मोरिंडा में बुलाई गई बैठकों और पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही गतिविधियों के बारे में पूछे गए सवाल पर रंधावा ने कहा कि इस विषय पर चरणजीत सिंह चन्नी ही बेहतर जवाब दे सकते हैं। उन्होंने कहा-
मैं दिल्ली में हूं और पार्टी की ओर से जो जिम्मेदारी मुझे दी गई है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा हूं।
रंधावा ने बताया कि करीब दो महीने पहले उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पंजाब के सीमावर्ती जिलों में आतंकवाद, गैंगस्टर गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। उसी पत्र के आधार पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया।
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सरहदी क्षेत्रों का मुद्दा लेकर पहुंचे रंधावा
उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान गुरदासपुर, तरनतारन और अमृतसर सहित सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था, सीमा पार से बढ़ती चुनौतियों तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार इन गंभीर मुद्दों से प्रभावी तरीके से निपटने में अपेक्षित सफलता नहीं दिखा पा रही है।
रंधावा ने यह भी कहा कि उन्होंने गृह मंत्री के समक्ष केंद्रीय जांच एजेंसियों और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सक्रिय भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
जेलों में बैठे अपराधियों पर जताई चिंता
उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब की जेलों से अपराधियों द्वारा खुलेआम धमकियां दिए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन राज्य सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। रंधावा ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार आतंकवाद के दौर में राज्य और केंद्र की एजेंसियां मिलकर काम करती थीं, उसी प्रकार वर्तमान परिस्थितियों में भी साझा रणनीति अपनाने की जरूरत है।
रंधावा के इस बयान के बाद उनकी मुलाकात को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयासों पर फिलहाल विराम लग गया है। हालांकि पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक फेरबदल के बाद बने हालात पर राजनीतिक नजरें अब भी टिकी हुई हैं।