DA बकाया पर हाई कोर्ट सख्त, बोले- किसी दबाव में नहीं आएंगे; पंजाब सरकार की चुनौती के बीच वीरवार तक टली सुनवाई
पंजाब कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए बकाया मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश ने दबाव से प्रभावित नहीं होने की बात कही, सुनवाई वीरवार तक टली।

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HighLights
हाई कोर्ट ने डीए बकाया पर सख्त रुख अपनाया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, अदालत दबाव में नहीं आएगी।
पंजाब सरकार की चुनौती के बीच सुनवाई वीरवार तक टली।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीएडीआर) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश तौर पर शपथ लेने के पहले ही दिन दो टूक कहा कि अदालत किसी भी दबाव में नहीं आएगी और कानून के मुताबिक ही फैसला होगा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने संविधान की शपथ ली है और उसे निभाना तथा उसकी रक्षा करना जानते हैं। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ डीए से जुड़े आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष की दलील या रणनीति उसे प्रभावित नहीं कर सकती। अदालत कानून के शासन के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।
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31 अगस्त तक डीए जारी करने का था आदेश
दरअसल, हाई कोर्ट ने अगस्त में पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित डीए/डीआर की अद्यतन किस्तें 31 अगस्त तक जारी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि बकाया भुगतान होने तक सरकार प्रिंट और इंटरनेट माध्यमों पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्चों से बचे।
इस आदेश को पंजाब सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सोमवार को हाई कोर्ट में इसी आदेश से जुड़े दो आवेदन सुनवाई के लिए आए।
एक आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन मित्तल ने कहा कि सरकार ने अब तक अदालत के निर्देश के मुताबिक अनुपालन शपथपत्र दाखिल नहीं किया है।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कौशल ने बताया कि सरकार ने 31 अगस्त के बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की है, लेकिन शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री की ओर से बताई गई कमियां अभी दूर नहीं की गई हैं।
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खर्च को लेकर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए करोड़ों रुपये जारी किए जाने का उल्लेख करते हुए सरकार के खर्चों पर सवाल उठाए गए। सरकार के वकील ने इन दलीलों पर आपत्ति जताई।
इसके बाद पीठ ने कहा कि वह सोमवार को मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए तैयार नहीं है। अदालत ने मामले को अब गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। हालांकि, इसी दौरान पीठ ने साफ कर दिया कि किसी भी पक्ष की ओर से बनाया जाने वाला दबाव अदालत के निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा।
