लुधियाना अदालत विस्फोट मामला; आरोपी को जमानत नहीं; सुनवाई टालने की कोशिश पर अदालत नाराज
लुधियाना अदालत विस्फोट मामले में आरोपी की जमानत याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि 32 में से 27 सुनवाई पर वकील की गैरहाजिरी मुकदमे क ...और पढ़ें

लुधियाना में ब्लास्ट के बाद मामला एनआईए ने अपने हाथ में लिया था। (फाइल फोटो)
HighLights
लुधियाना बम विस्फोट आरोपी राजन प्रीत सिंह को जमानत नहीं मिली।
पाकिस्तान आधारित तस्करों से संबंध और वकील की अनुपस्थिति पर कोर्ट नाराज।
हाईकोर्ट ने कहा, आरोपी जमानत का हकदार नहीं है।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 2021 के लुधियाना जिला अदालत बम विस्फोट मामले में पाकिस्तान आधारित तस्करों से कथित संबंध रखने वाले आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील की 32 में से 27 सुनवाई पर अनुपस्थिति मुकदमे को जानबूझकर लंबित रखने की साजिश प्रतीत होती है।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ के सामने आरोपी राजन प्रीत सिंह ने एनआईए कोर्ट द्वारा जमानत याचिका रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि जिन मामलों में कई आरोपी होते हैं, वहां कमजोर पक्ष वाला आरोपी अक्सर मुकदमे को कृत्रिम रूप से लंबा खींचने की कोशिश करता है ताकि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई के अधिकार का आधार बनाकर राहत हासिल की जा सके।
एनआईए के वकील द्वारा अदालत को दिए गए आदेश पत्रों के अनुसार मामले में 32 तारीखें लगीं, जिनमें से 27 मौकों पर राजन प्रीत सिंह के वकील अनुपस्थित रहे।
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हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी तस्करों से संबंध का जिक्र किया
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से पाकिस्तान आधारित तस्करों के साथ आरोपी के संबंध और उनके पास से भारी मात्रा में हथियार-गोला-बारूद बरामद होने के साक्ष्य भी सामने आए हैं। ऐसे में पूरे मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी न तो मामले के गुण-दोष के आधार पर और न ही हिरासत में देरी के आधार पर जमानत का हकदार है।
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2021 की दोपहर हुआ था धमाका
23 दिसंबर 2021 को दोपहर करीब 12:30 बजे लुधियाना जिला अदालत परिसर में एक अदालत कक्ष के पास बने बाथरूम में जोरदार विस्फोट हुआ था। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और पांच लोग घायल हुए थे। बाद में मृतक की पहचान पंजाब पुलिस के बर्खास्त हेड कांस्टेबल गगनदीप सिंह के रूप में हुई, जिसे जांच में बम का हैंडलर बताया गया। जांच में पाकिस्तान आधारित तस्करों की संलिप्तता और उनके माध्यम से बम मिलने की बात भी सामने आई। मामले में केंद्र सरकार ने 11 जनवरी को जांच एनआईए को सौंप दी थी।