4 बार MLA, 2 बार पंजाब के वित्त मंत्री... CM मान तक को लड़वाया चुनाव; कौन हैं BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनप्रीत बादल
मनप्रीत सिंह बादल का राजनीतिक सफर शिरोमणि अकाली दल से शुरू होकर कांग्रेस और अब भाजपा तक पहुंचा है। वे ...और पढ़ें
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मनप्रीत सिंह बादल: अकाली राजनीति से भाजपा तक का सफर।
HighLights
मनप्रीत बादल का राजनीतिक सफर अकाली दल से शुरू हुआ
चार बार विधायक और पंजाब के वित्त मंत्री रहे
कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होकर लिया नया मोड़
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में मनप्रीत सिंह बादल ऐसा नाम हैं, जिनका राजनीतिक सफर शिरोमणि अकाली दल से शुरू होकर अपनी पार्टी बनाने, कांग्रेस में शामिल होने और अब भाजपा तक पहुंचा है। बादल परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनप्रीत सिंह बादल चार बार गिद्दड़बाहा से विधायक रहे और पंजाब के वित्त मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
मनप्रीत सिंह बादल के पिता गुरदास सिंह बादल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सगे भाई थे। इस लिहाज से वह शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के चचेरे भाई हैं। मनप्रीत ने 1995 में पहली बार अकाली दल के टिकट पर गिद्दड़बाहा से विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 1997, 2002 और 2007 में भी इसी सीट से विधायक बने।
2007 में पहली बार वित्त मंत्री बने थे मनप्रीत बादल
2007 में अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार बनने पर मनप्रीत सिंह बादल को वित्त मंत्री बनाया गया। वर्ष 2010 में बादल परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेद बढ़े और सुखबीर सिंह बादल से उनके मतभेद सामने आए। इसके बाद उन्होंने अकाली दल छोड़कर पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) बनाई।
2012 के विधानसभा चुनाव में पीपीपी ने वाम दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा, लेकिन मनप्रीत समेत पार्टी का कोई प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका। इसी दौरान मनप्रीत बादल ने भगवंत मान को अपनी पार्टी में शामिल किया और उन्हें लहरा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। हालांकि, भगवंत मान चुनाव नहीं जीत सके।
2017 में कांग्रेस के टिकट पर लड़ा चुनाव
15 जनवरी 2016 को मनप्रीत सिंह बादल ने पीपीपी का कांग्रेस में विलय कर दिया। वर्ष 2017 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बठिंडा शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में उन्हें दोबारा वित्त मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
वित्त मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में पंजाब के वित्तीय हालात और कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे। 2018 में पंजाब डेवलपमेंट टैक्स लगाए जाने को लेकर कर्मचारी संगठनों ने भी उनका विरोध किया। छठे वेतन आयोग और महंगाई भत्ते के बकाये को लेकर भी वह निशाने पर रहे।
2022 के विधानसभा चुनाव में मनप्रीत सिंह बादल बठिंडा शहर सीट से चुनाव हार गए। इसके बाद कांग्रेस में उनकी सक्रियता सीमित होती गई। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में भी खटास की चर्चा रही।
अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के साथ ही उनके राजनीतिक सफर ने एक नया मोड़ लिया है। इस तरह मनप्रीत सिंह बादल का करीब तीन दशक का राजनीतिक सफर पंजाब की सत्ता और विपक्ष की राजनीति के कई अहम पड़ावों से होकर गुजरा है।
