कम उम्र के प्रेम संबंध मामले में दोषी नाबालिग की सजा निलंबित; आयु अंतर को माना महत्वपूर्ण पहलू
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए एक नाबालिग की 20 वर्ष की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि घटना के समय आरोपी और ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
नाबालिग की 20 साल की पॉक्सो सजा निलंबित।
हाई कोर्ट ने आयु अंतर, सहमति पर विचार किया।
25 हजार के मुचलके पर जमानत, सख्त शर्तें लागू।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पाक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए एक नाबालिग युवक की 20 वर्ष की सजा अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि घटना के समय आरोपित और पीड़िता दोनों नाबालिग थे तथा उनके बीच आयु का अंतर बहुत कम था, इसलिए मामले के तथ्यों को देखते हुए कानून की कठोरता और वास्तविक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से संकेत मिलता है कि यदि यौन संबंध हुआ भी हो तो परिस्थितियां सहमति की ओर इशारा करती हैं, हालांकि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की की सहमति मान्य नहीं होती और ऐसा संबंध वैधानिक दुष्कर्म की श्रेणी में आता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस कानूनी स्थिति के बावजूद अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबन पर विचार करते समय सभी परिस्थितियों का संतुलित मूल्यांकन आवश्यक है।
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आयु के अंतर पर हुआ विचार
मामले में सत्र अदालत, पटियाला ने आरोपित को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और पाक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। घटना के समय आरोपित की आयु लगभग 17 वर्ष 5 माह थी, जबकि पीड़िता की आयु लगभग 13 वर्ष 10 माह बताई गई, जिससे दोनों के बीच लगभग चार वर्ष का आयु अंतर था। आरोपित लगभग छह माह तक हिरासत में रह चुका था।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि प्राथमिकी घटना के लगभग एक माह बाद दर्ज की गई थी और शिकायत उस समय सामने आई जब पीड़िता को आरोपित के साथ देखा गया। अदालत ने कहा कि इन तथ्यों सहित सभी साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन अपील की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।खंडपीठ ने यह भी कहा कि आरोपित का आपराधिक रिकार्ड पूर्व में साफ रहा है और वह जीवन के ऐसे चरण में है, जहां शिक्षा और कौशल विकास के अवसर बाधित नहीं होने चाहिए।
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आरोपित को 25 हजार के मचुलके पर जमानत
साथ ही अदालत ने माना कि आपराधिक अपीलों की बड़ी संख्या लंबित होने के कारण इस मामले की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में होना संभव नहीं दिख रहा। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा के क्रियान्वयन को अपील के अंतिम निर्णय तक निलंबित करते हुए आरोपित को 25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया।
अदालत ने सख्त शर्तें भी लगाईं कि आरोपी पीड़िता या उसके परिवार से किसी प्रकार का संपर्क नहीं करेगा, अपने पते और संपर्क विवरण अद्यतन रखेगा तथा किसी भी शर्त के उल्लंघन या नए गंभीर अपराध की स्थिति में जमानत स्वतः रद्द मानी जाएगी।