ZEE5 से क्यों हटी जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी 'सतलुज'? हाई कोर्ट में दर्ज हुई याचिका, फिल्म को री-रिलीज करने की मांग
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 से हटाए जाने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। ...और पढ़ें

जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी सतलुज (जागरण फाइल)
HighLights
'सतलुज' फिल्म को ZEE5 से हटाए जाने पर याचिका दायर
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में फिल्म बहाली की मांग
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन का आरोप
राज्य ब्यूरो ,चंडीगढ़। जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 से हटाए जाने के मामले ने अब न्यायिक मोड़ ले लिया है। फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि फिल्म को बिना किसी सार्वजनिक वैधानिक या न्यायिक आदेश के हटाया गया, जो संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता शरवण सिंह ने संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत दायर याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), पंजाब सरकार, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड तथा ज़ी5 को प्रतिवादी बनाया है।
याचिका में किया गया आग्रह
याचिका में हाई कोर्ट से आग्रह किया गया है कि फिल्म 'सतलुज'' को पूरे देश में ज़ी5 पर तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही यदि फिल्म हटाने के पीछे कोई सरकारी, वैधानिक या न्यायिक आदेश है तो उसे सार्वजनिक करने का भी निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' शीर्षक से बनाई गई थी और बाद में 'सतलुज' नाम से 3 जुलाई 2026 को ज़ी5 पर प्रदर्शित की गई। हालांकि रिलीज के दो दिन बाद, 5 जुलाई को इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि ज़ी5 ने केवल 'वर्तमान परिस्थितियों' का हवाला दिया, लेकिन फिल्म हटाने के लिए किसी कानूनी आदेश, सरकारी निर्देश या न्यायालय के आदेश का उल्लेख नहीं किया।
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है फिल्म
याचिका में कहा गया है कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता दिवंगत जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और पंजाब में कथित अवैध दाह संस्कारों के मामलों पर आधारित है। इन घटनाओं से जुड़े तथ्य पहले ही सर्वोच्च न्यायालय, विभिन्न न्यायालयों, सीबीआई जांच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य सार्वजनिक अभिलेखों का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में फिल्म किसी गोपनीय या प्रतिबंधित सामग्री का प्रसारण नहीं करती, बल्कि पहले से सार्वजनिक और न्यायिक रूप से स्थापित तथ्यों का सिनेमाई प्रस्तुतीकरण है।
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निर्धारित प्रक्रिया का नहीं किया पालन
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी फिल्म को हटाने का निर्णय विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं लिया गया है तो यह कानून के शासन के सिद्धांतों के विपरीत है। साथ ही, यह उन लाखों दर्शकों के अधिकारों का भी हनन है, जिन्होंने वैध रूप से उपलब्ध सामग्री देखने के लिए ओटीटी मंच की सदस्यता ली है।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करते हुए फिल्म की स्ट्रीमिंग तत्काल बहाल कराने, फिल्म हटाने के आधार का खुलासा कराने तथा भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई केवल विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत ही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करने की मांग की है। मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है।