अवैध खनन पर पंजाब विधानसभा में घमासान, कमेटी की मांग पर कांग्रेस का वॉकआउट; चीमा ने भाजपा को दी चुनौती
पंजाब विधानसभा में अवैध खनन पर तीखी बहस हुई। कमेटी बनाने की मांग नहीं मानी गई तो कांग्रेस ने वॉकआउट ...और पढ़ें

पंजाब विधानसभा में सत्र के दौरान विपक्ष के नेता अपनी बात रखते हुए।
HighLights
अवैध खनन पर विधानसभा में तीखी बहस, कांग्रेस का वॉकआउट।
सरकार ने अवैध खनन पर नियंत्रण और राजस्व वृद्धि का दावा किया।
भाखड़ा बांध की स्थिरता और पोटाश की खोज पर भी चर्चा हुई।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा में शून्यकाल के दौरान अवैध खनन का मुद्दा उठते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने प्रदेश में अवैध खनन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विधानसभा की कमेटी गठित करने की मांग की, जिसके बाद सदन में तीखी बहस शुरू हो गई। कांग्रेस ने भी जमीनी हालात का पता लगाने के लिए सदन की कमेटी बनाने की मांग दोहराई।
मांग स्वीकार नहीं होने पर कांग्रेस विधायक दल ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। इस दौरान खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने भाखड़ा बांध, अवैध खनन और पंजाब के खनिज संसाधनों को लेकर सरकार का पक्ष रखा, जबकि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर पंजाब का वैधानिक हिस्सा रोकने का आरोप लगाया।
शून्यकाल में भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा, कांग्रेस विधायक अजयवीर सिंह जाखड़ और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देते हुए मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि भाखड़ा बांध के झुकने को लेकर लोगों में किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले एक समाचार चैनल ने यह खबर चला दी थी कि भाखड़ा बांध झुक गया है, जिससे पंजाब के लोगों में दहशत फैल गई थी।
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भाखड़ा में मामूल झुकाव सामान्य
उन्होंने स्पष्ट किया कि बांध की डिजाइन ऐसी है कि पानी के दबाव में उसमें मामूली झुकाव आना सामान्य प्रक्रिया है और दबाव कम होने पर वह अपनी मूल स्थिति में लौट आता है। वर्ष 1995 से 2025 के बीच यह प्रक्रिया 15 बार हुई और हर बार बांध सामान्य स्थिति में वापस आ गया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के विशेषज्ञ भी भाखड़ा बांध का दौरा कर इसकी इंजीनियरिंग की सराहना कर चुके हैं।
मंत्री ने कहा कि बांध में लगभग 26 प्रतिशत सिल्ट जमा होने से जल भंडारण क्षमता प्रभावित हुई है, लेकिन इसका बांध की सुरक्षा से कोई संबंध नहीं है। सिल्ट हटाने की जिम्मेदारी भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और केंद्र सरकार की है। पंजाब सरकार बीबीएमबी की बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठा चुकी है और हाल ही में केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा गया है। सिल्ट हटने के बाद जल भंडारण क्षमता बढ़ जाएगी।
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अवैध खनन पर हुआ प्रभावी नियंत्रण
अवैध खनन के आरोपों पर बरिंदर गोयल ने कहा कि जहां भी अवैध खनन की शिकायत मिलती है, वहां सर्वे कराया जाता है और शिकायत सही पाए जाने पर एफआईआर दर्ज की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण किया है। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकारों के समय खनन से करीब 120 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था, जबकि मौजूदा सरकार ने इस वर्ष लगभग 825 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कराए गए खनन सुधारों के मूल्यांकन में पंजाब अपनी श्रेणी में देश में पहले स्थान पर रहा, जिसके लिए राज्य को 200 करोड़ रुपये का अप्रिसिएशन अवार्ड मिला।
राज्य में खनिज संसाधनों की तलाश जारी
मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने केवल रेत-बजरी तक ही ध्यान सीमित रखा, जबकि जमीन के नीचे मौजूद अन्य खनिज संपदा पर कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1989 में पंजाब में पोटाश मिलने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनकी सरकार बनने के बाद ओडिशा और गुजरात में हुई बैठकों में उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाया।
इसके बाद केंद्र ने 19 करोड़ रुपये मंजूर किए और राज्य में 10 स्थानों पर ड्रिलिंग का कार्य शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि यदि पोटाश का व्यावसायिक भंडार मिलता है तो पंजाब को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जमीन के नीचे मौजूद अन्य महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की भी तलाश कर रही है।
खनन का मुद्दा उठाने वालों को धमकियां
मंत्री के जवाब के दौरान भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा सदन में मौजूद नहीं थे। बाद में सदन में लौटने पर उन्होंने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वालों को आम आदमी पार्टी के बड़े नेता धमकियां देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का दावा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं कर सकी।
उन्होंने कहा कि अवैध खनन की वास्तविक स्थिति जाननी है तो प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से बात करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर मुद्दे पर केंद्र सरकार को दोषी ठहराती है।
चीमा ने केंद्र सरकार को घेरा
इसके बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा केंद्र और राज्य के संबंधों की बात करती है, लेकिन केंद्र सरकार पंजाब का वैधानिक हिस्सा रोक रही है। उन्होंने भाजपा विधायकों से कहा कि यदि केंद्र में उनकी सरकार है तो पंजाब का बकाया पैसा दिलाकर लाएं। उन्होंने सवाल उठाया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों और मिड-डे मील कर्मचारियों के मानदेय में वर्षों से बढ़ोतरी क्यों नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कई योजनाएं शुरू करते समय सौ प्रतिशत फंड देती है, लेकिन बाद में अपनी हिस्सेदारी कम कर राज्यों पर वित्तीय बोझ डाल देती है। उन्होंने कहा कि पंजाब देश का अन्न भंडार है, इसके बावजूद राज्य के साथ वित्तीय भेदभाव किया जा रहा है।
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राज्य में मिला पोटाश का भंडार
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि यदि पंजाब में पोटाश का भंडार मिला है तो यह राज्य के लिए अच्छी खबर है। उन्होंने सरकार से पोटाश संबंधी वायबिलिटी रिपोर्ट सदन में रखने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि इसका व्यावसायिक दोहन संभव है या नहीं।
उन्होंने कहा कि जमीन के नीचे मौजूद खनिज संपदा की खोज अच्छी बात है, लेकिन जमीन पर लोगों से जुड़े मुद्दों पर भी उतनी ही गंभीरता से काम होना चाहिए।
कमेटी बनाने की मांग पर सहमति नहीं बनने के बाद कांग्रेस विधायक दल ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। सदन में कुछ देर तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी होती रही।
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