महिला दिवस पर बजट लाने की तैयारी; महिलाओं को हजार रुपये योजना दे सकती है सरकार, सियासी हलचल तेज
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 8 मार्च को पंजाब बजट पेश करने की बात कही है, जो महिला दिवस भी है। अटकलें हैं कि इस बजट में महिलाओं को 1000 रुपये देने की योजन ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री भगवंत मान।
इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़। गुजरात दौरे के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आठ मार्च को बजट पेश करने की बात कही है। हालांकि देखने में यह सिर्फ एक औपचारिक घोषणा है लेकिन इस तारीख की घोषणा करना एक राजनीतिक तीर छोड़ना भी है। वह इसलिए कि आठ मार्च को रविवार है तो क्या इस बार पंजाब का बजट भी रविवार को पेश होगा? यह सवाल भी उठने लगा है।
दरअसल, आठ मार्च को महिला दिवस और अपनी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में पेश किए जाने वाले बजट में महिलाओं को एक-एक हजार रुपए देने की घोषणा की जा सकती है। हालांकि सरकार के सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि आठ मार्च को बजट पेश होगा।
उनका कहना है कि 23 फरवरी को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में ही यह फैसला होगा, लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान जो आज गुजरात के दौरे पर थे और प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आठ मार्च को बजट पेश करने की बात कही, उससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आप सरकार ने इस दिन को जानबूझकर चुना है।
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सवाल: कैसे योजना शुरू करेगी सरकार
उधर, महिलाओं को एक-एक हजार रुपए दिए कैसे जाने हैं इसको लेकर अभी प्रोग्राम तय नहीं हुआ। मसलन महिलाओं को चयन किस आधार पर किया जाएगा। साथ ही यह कि क्या सभी महिलाओं को दी जाए या फिर इसे वैकल्पिक रखा जाए। यानी महिलाओं को क्या यह विकल्प दिया जाए कि वह इस योजना का हिस्सा होना चाहती हैं कि नहीं।
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स्कीम जरूरतमंद महिलाओं तक हो सकती है सीमित
उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि जैसे कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने सभी किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था, लेकिन बाद में इसे दो लाख रुपये तक के कर्ज वाले सीमांत किसानों तक सीमित कर दिया था, उसी तरह का विचार अब भगवंत मान सरकार में भी चल रहा है। वित्तीय स्थिति को देखते हुए योजना को केवल जरूरतमंद महिलाओं तक सीमित रखने पर चर्चा हो रही है।
सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और अंतिम फैसला पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल लेंगे। सरकार के एक अधिकारी के अनुसार यदि योजना को वैकल्पिक रखा गया तो करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि सभी महिलाओं को शामिल करने पर यह राशि 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
यह भी विचार हो रहा है कि पैसा हर महीने दिया जाए या एकमुश्त। वित्त विभाग चाहता है कि भुगतान मासिक आधार पर कम राशि में किया जाए, ताकि सरकार को अतिरिक्त ब्याज का बोझ न उठाना पड़े।
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