पंजाब कर्मचारियों के महंगाई भत्ता बकाया मामले में उच्च न्यायालय सख्त, सभी पक्षों को तैयारी के साथ बुलाया
सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता बकाया मामले में उच्च न्यायालय ने सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इसे व्यापक जनहित का ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने डीए बकाया मामले की सुनवाई स्थगित की।
एक्टिंग चीफ जस्टिस ने इसे जनहित का मामला बताया।
सरकार को 30 जून तक भुगतान का आदेश बरकरार।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (डीए) बकाया से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। उन्होंने कहा कि यह व्यापक जनहित का मामला है और अब इस प्रकरण की सुनवाई उनकी खंडपीठ ही करेगी।
सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं और सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी पक्ष पूरी तैयारी के साथ अगली सुनवाई पर उपस्थित हों, ताकि अब तक हर पक्ष का पक्ष सुना जा सके।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के समक्ष तर्क दिया गया कि सरकार के पास विभिन्न मुफ्त योजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है। चाहे मुफ्त बिजली देने की बात हो, मुफ्त बस सेवा संचालित करनी हो अथवा महिलाओं को एक-एक हजार रुपये देने की योजना हो, सरकार इन पर खर्च कर रही है। लेकिन जब सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन देने या कई वर्षों से लंबित महंगाई भत्ते के बकाये के भुगतान की बात आती है तो सरकार वित्तीय संकट का हवाला देने लगती है।
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मामला व्यापक जनहित से जुड़ा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि महंगाई भत्ते का बकाया कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है।
इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस ने कहा कि यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है और इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को सुना जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'यह व्यापक जनहित का मामला है, कल सभी पक्ष तैयारी करके आएं, अब तक सबका पक्ष सुना जाएगा।'
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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए निर्धारित कर दी है।
सरकार पेश कर चुकी सीलबंद रिपोर्ट
इस मामले में मई माह में सरकार की ओर से हाई कोर्ट में कैबिनेट सब कमेटी की एक सीलबंद रिपोर्ट पेश की गई थी जिसमें यह बताया गया था कि कर्मचारियों का बकाया डीए किस प्रकार जारी किया जाएगा। हालांकि हाई कोर्ट ने सरकार के इस रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सरकारों का पुराना हथकंडा है कि जब भी किसी मामले को लंबा खींचना होता है तो एक कमेटी बना दी जाती है।
मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया था कि सरकार की मंशा पूरी तरह सकारात्मक है और वह कर्मचारियों को डीए जारी करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार को थोड़ा समय चाहिए। इसी आधार पर सरकार ने हाई कोर्ट से मांग की कि सिंगल बेंच द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगा दी जाए।
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सरकार की दलील से संतुष्ट नहीं कोर्ट
हाई कोर्ट सरकार की इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने साफ कहा कि केवल रिपोर्ट पेश करने या आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, सरकार को प्रैक्टिकल स्तर पर कार्रवाई करके दिखानी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का कोई औचित्य नहीं है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई कोर्ट ने सिंगल बेंच के उस आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है, जिसमें पंजाब सरकार को 30 जून तक कर्मचारियों का डीए बकाया जारी करने के निर्देश दिए गए थे। यानी फिलहाल सरकार पर तय समय सीमा के भीतर भुगतान करने की जिम्मेदारी बनी हुई है।