यमुना जल को लेकर नया विवाद, पंजाब ने मांगा हिस्सा तो दिल्ली ने अपने हिस्से पर कटौती से किया इनकार
यमुना जल बंटवारे के 30 वर्ष पुराने समझौते की पुनर्समीक्षा से पहले पंजाब ने अपने हिस्से का दावा पेश किया ...और पढ़ें

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HighLights
पंजाब ने यमुना जल बंटवारे में हिस्सेदारी का दावा किया।
दिल्ली ने मौजूदा जल कोटे में कटौती का विरोध किया।
1994 के यमुना जल समझौते की समीक्षा प्रक्रिया शुरू।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर 1994 में हुए अंतरराज्यीय समझौते की पुनर्समीक्षा से पहले पंजाब ने अपने लिए भी हिस्सेदारी का दावा पेश किया है। यह मुद्दा नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के राज्यों के अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में उठा।
पंजाब ने तर्क दिया कि जैसे हरियाणा संयुक्त पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य होने के आधार पर रावी-ब्यास के पानी में हिस्सा लेता है, उसी तरह पंजाब को भी यमुना जल बंटवारे में अधिकार मिलना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब सरकार ने बैठक में कहा कि 1994 के समझौते में उसे शामिल नहीं किया गया था, जबकि वह भी यमुना बेसिन से जुड़ा राज्य है। पंजाब का दावा है कि 1954 में अविभाजित पंजाब और उत्तर प्रदेश के बीच हुए समझौते के तहत पंजाब को यमुना के पानी का दो-तिहाई हिस्सा मिलने का अधिकार था। इसके अलावा 1972 के सिंचाई आयोग ने भी पंजाब को यमुना बेसिन का हिस्सा माना था।
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दिल्ली ने मौजूदा कोटा कम करने से किया इनकार
उधर दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि यमुना जल बंटवारे की नई व्यवस्था बनाई जाती है तो राष्ट्रीय राजधानी के मौजूदा हिस्से में किसी प्रकार की कटौती नहीं होनी चाहिए। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजधानी पहले ही तय हिस्से से कम पानी प्राप्त कर रही है।
1994 के समझौते के अनुसार मुनक नहर के जरिए दिल्ली को 1,149 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में बावाना तक केवल 924 क्यूसेक पानी ही पहुंच रहा है। अधिकारी ने इसकी वजह रिसाव और लीकेज को बताया।
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30 साल बाद होना है समझौते का पुनर्विचार
यमुना जल बंटवारे का मौजूदा समझौता 12 मई 1994 को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के बीच हुआ था। इस समझौते की अवधि 30 वर्ष की थी और अब इसकी पुनर्विचार प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसी कारण विभिन्न राज्य अपने-अपने दावे रख रहे हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार राजधानी में रोजाना करीब 1,250 मिलियन गैलन पानी की जरूरत है, जबकि उपलब्धता करीब 1,000 मिलियन गैलन प्रतिदिन है। इस तरह 250 मिलियन गैलन की कमी बनी हुई है।
दिल्ली अपनी 86.5 प्रतिशत कच्चे पानी की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों पर निर्भर होकर पूरी करती है। अधिकारियों का कहना है कि 1994 में दिल्ली की आबादी करीब एक करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग ढाई करोड़ तक पहुंच चुकी है, जिससे पानी की मांग भी लगातार बढ़ी है।
भाखड़ा, एसवाईएल और यमुना जल को लेकर पहले भी रहे विवाद
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच जल बंटवारे को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों से कानूनी व राजनीतिक टकराव जारी है। हरियाणा लंबे समय से एसवाईएल के जरिए अपने हिस्से का पानी मांगता रहा है, जबकि पंजाब ने अपने नदी जल संसाधनों पर दबाव का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है।
इसी तरह भाखड़ा बांध से मिलने वाले पानी के वितरण को लेकर भी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच समय-समय पर मतभेद उभरते रहे हैं।
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