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    नदियों की गाद से बनेंगे पंजाब के बड़े राजमार्ग, सरकार के नए फैसले से परियोजनाओं को मिलेगी तेज रफ्तार

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 07:15 AM (IST)

    पंजाब सरकार ने नदियों और ड्रेनों की डी-सिल्टिंग से निकली मिट्टी को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में उपयोग की मंजूरी देकर नई व्यवस्था लागू की। ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    HighLights

    1. राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए नदियों की गाद का उपयोग होगा।

    2. परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, निर्माण लागत भी घटेगी।

    3. नदियों की सफाई और बाढ़ नियंत्रण में सहायक होगा।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। राज्य में निर्माणाधीन और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। एनएचएआई राज्य में हजारों करोड़ रुपये की लागत से कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें बड़े पैमाने पर मिट्टी की जरूरत पड़ती है। पहले निर्माण एजेंसियों को अलग-अलग स्थानों से मिट्टी खरीदनी पड़ती थी, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते थे।

    नई अधिसूचना से सरकार को डी-सिल्टिंग से निकली सामग्री के निस्तारण की समस्या से राहत मिलेगी, जबकि एनएचएआई को कम लागत पर आवश्यक मिट्टी उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के पुन: उपयोग और आधारभूत ढांचा विकास—तीनों उद्देश्यों को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।

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    स्थिति को देखते हुए लिया निर्णय

    इनमें दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, लुधियाना-रूपनगर (रोपड़) ग्रीनफील्ड हाईवे, अमृतसर बाईपास, जालंधर बाईपास, मोहाली-सरहिंद मार्ग के उन्नयन, तथा भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। इन परियोजनाओं में बड़ी मात्रा में मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिसे अब डी-सिल्टिंग से निकली सामग्री से पूरा किया जा सकेगा।

    राज्य सरकार पिछले कुछ समय से मानसून से पहले और बाद में नदियों, घग्गर, सतलुज, ब्यास तथा प्रमुख ड्रेनों की डी-सिल्टिंग पर जोर दे रही है ताकि बाढ़ का खतरा कम किया जा सके। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने और नदियों-चोओं की सफाई से निकलने वाली मिट्टी के बेहतर उपयोग के लिए बड़ा फैसला लिया है।

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    नदियों की सफाई का कार्य तेज होगा

    जल संसाधन विभाग ने 22 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और उसके अधिकृत ठेकेदारों को पंजाब की नदियों व ड्रेनों की डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) के दौरान निकलने वाली मिट्टी का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में करने की अनुमति दे दी है।

    इससे एक ओर नदियों की सफाई का कार्य तेज होगा तो दूसरी ओर हाईवे निर्माण के लिए आवश्यक मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।अधिसूचना के अनुसार डी-सिल्टिंग स्थलों का आवंटन एनएचएआई या उसके अधिकृत ठेकेदारों को नामांकन के आधार पर किया जाएगा।

    इसके लिए 3 रुपये प्रति घन फुट की आरक्षित दर तय की गई है। यह व्यवस्था 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला मंत्रिमंडल मामलों से जुड़े सामान्य प्रशासन विभाग की सहमति के बाद लागू किया गया।

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