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DA बकाये पर पंजाब सरकार का पलटवार, वित्त मंत्री बोले-कई राज्यों से ज्यादा वेतन; सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

Published: Thu, 03 Sep 2026 01:12 PM (IST)

डीए बकाये पर पंजाब सरकार ने अपना पक्ष रखा। हरपाल चीमा ने कहा कि कर्मचारियों को कई राज्यों से अधिक वेतन मिलता है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।

कैबिनेट मिनिस्टर हरपाल चीमा, अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर।

कैबिनेट मिनिस्टर हरपाल चीमा, अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर।

HighLights

  1. पंजाब सरकार ने डीए बकाये पर अपना पक्ष स्पष्ट किया।

  2. वित्त मंत्री चीमा ने कहा, पंजाब कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाते।

  3. कर्मचारियों के डीए बकाये का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में।

रोहित कुमार, चंडीगढ़। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को लेकर चल रहे विवाद के बीच पंजाब सरकार ने गुरुवार को तीन मंत्रियों की संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं। वहीं, मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने भी सरकार की ओर से डीए को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट की।

चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों का मूल वेतन और महंगाई भत्ता जोड़ने के बाद कुल वेतन हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के कर्मचारियों से अधिक है। गुजरात के कर्मचारियों की तुलना में पंजाब के कर्मचारियों को करीब 28 प्रतिशत अधिक वेतन मिलता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब अपने कुल राजस्व का करीब 51 प्रतिशत कर्मचारियों और पेंशनरों पर खर्च करता है, जबकि प्रमुख राज्यों में यह औसत करीब 38 प्रतिशत है। वेतन, पेंशन और कर्ज के ब्याज को मिलाकर राजस्व का करीब 82 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो जाता है

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केंद्र से तुलना में भी पंजाब आगे

हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब के कर्मचारियों की हाथ में आने वाली तनख्वाह भी देश में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि लिपिक, चालक, आशुलिपिक, शिक्षक और पुलिस जवानों का वेतन कई मामलों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों से भी अधिक है।

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 42 प्रतिशत डीए के साथ पंजाब में लिपिक और कांस्टेबल को 54,812 रुपये मिलते हैं, जबकि केंद्र में 60 प्रतिशत डीए के बावजूद यह राशि 36,960 रुपये है।

चीमा ने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के समय कर्मचारियों को 28 प्रतिशत डीए मिल रहा था। अक्टूबर 2022 में इसे 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और नवंबर 2024 में 42 प्रतिशत किया गया।

सरकार बकाये से भाग नहीं रही

मंत्री अमन अरोड़ा ने सरकार के वित्तीय पक्ष को सामने रखते हुए कहा कि 2016 से 2021 के बीच का करीब 14,191 करोड़ रुपये का बकाया पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों के समय का है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार इस बकाये का भुगतान चरणबद्ध तरीके से कर रही है। सरकार के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों को अब तक करीब 4,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

सरकार ने 13 फरवरी 2025 को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद चार वित्तीय वर्षों में बकाये के भुगतान की योजना बनाई थी। सरकार का कहना है कि वह कर्मचारियों के बकाये से इनकार नहीं कर रही, बल्कि अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार भुगतान कर रही है।

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केंद्र का डीए देना अनिवार्य नहीं

डाॅ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब में कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और डीए पंजाब सिविल सर्विस रिवाइज्ड-पे रूल्स, 2021 तथा संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत तय होता है। इन नियमों में केंद्र सरकार के बराबर डीए देना अनिवार्य नहीं किया गया है।

पंजाब सरकार अपनी वित्तीय स्थिति और राज्य के नियमों के अनुसार डीए तय करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तुलना राज्य कर्मचारियों से करना उचित नहीं है, क्योंकि उनके सेवा नियम अलग हैं और उनका डीए केंद्र सरकार तय करती है।

आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार

आठ अप्रैल 2026 को उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए 30 जून तक डीए और डीआर का बकाया देने का आदेश दिया था। तीन अगस्त को खंडपीठ ने सरकार और पीएसपीसीएल की अपीलें खारिज करते हुए फैसला बरकरार रखा। 31 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा थी। इसके बाद पंजाब सरकार ने एक सितंबर को उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह कर्मचारियों की हाथ में आने वाली कुल तनख्वाह को केंद्रीय समकक्षों के बराबर करने के लिए डीए में जरूरी बढ़ोतरी करने को तैयार है। हालांकि, समान दर से डीए देने पर पहले से अधिक वेतन पा रहे कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का तर्क भी सरकार ने दिया है।

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