जालंधर में स्वाइन फ्लू के 7 मरीज मिले, सभी बुजुर्ग; डॉक्टर बोले- लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
जालंधर में स्वाइन फ्लू के सात मरीज सामने आए हैं। सभी बुजुर्ग हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाई और लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की।

पॉजीटिव मरीजों की गिनती 7 पहुंची है।
HighLights
जालंधर में स्वाइन फ्लू के 7 मामले, सभी बुजुर्ग मरीज।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति नियंत्रण में बताई, सतर्क रहने की सलाह।
डॉक्टरों ने शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने को कहा।
जागरण संवाददाता, जालंधर। जालंधर जिले में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। 6 नए मामले सामने आने के बाद जिले में इस साल कुल मरीजों की संख्या 7 हो गई है। सभी नए मरीज बुजुर्ग हैं, जिससे सेहत विभाग ने हाई-रिस्क ग्रुप को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है।
सेहत विभाग ने लोगों को कहां के घबराने की जरूरत नहीं है सतर्क रहे। सिविल सर्जन डॉ. राजेश गर्ग ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग के पास इलाज और दवाओं की पूरी व्यवस्था है।
कौन हैं 7 मरीज, कहां के रहने वाले?
सेहत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सभी मरीजों की उम्र 50 साल से अधिक है। इनमें 86 साल का पुरुष, 84 साल की महिला, 78 साल का पुरुष, 67 साल का पुरुष, 56 साल की महिला और 53 साल का पुरुष शामिल है। इनमें से दो मरीज फिल्लौर क्षेत्र के हैं, जबकि बाकी चार जालंधर शहर के अलग-अलग इलाकों से हैं। एक बुजुर्ग मरीज को सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल किया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
बाकी मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। डॉ. राजेश गर्ग ने बताया कि जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शोभना बांसल की अगुवाई में विभाग की टीमों ने तुरंत सर्वे शुरू कर दिया है। मरीजों के संपर्क में आए सभी लोगों को ट्रेस कर लिया गया है और उन्हें एहतियात के तौर पर दवा शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा, यह एक नोटिफायबल बीमारी है। अगर किसी भी निजी अस्पताल या क्लीनिक में स्वाइन फ्लू के लक्षण वाला मरीज आता है, तो डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे तुरंत इसकी सूचना आईडीएसपी विभाग को दें, ताकि समय पर कार्रवाई हो सके।
स्वाइन फ्लू की पुष्टि सिर्फ सरकारी लैब से
जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. शोभना बांसल ने टेस्ट की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों को तीन श्रेणियों - ए, बी और सी में बांटा जाता है। श्रेणी 'ए' और 'बी' में हल्के लक्षण जैसे बुखार, खांसी, गले में खराश वाले मरीज आते हैं, जिन्हें सिर्फ होम आइसोलेशन, पर्याप्त आराम और लक्षण के हिसाब से दवा की जरूरत होती है। उनका टेस्ट जरूरी नहीं है।
टेस्ट सिर्फ श्रेणी 'सी' के मरीजों का किया जाता है, जिनमें तेज बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, लो ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर लक्षण होते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जालंधर जिले में किसी भी प्राइवेट लैब को स्वाइन फ्लू टेस्ट की मान्यता नहीं दी गई है।
सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को सैंपल आईडएसपी विभाग को भेजना होता है, जहां से उसे जांच के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर भेजा जाता है। राज्य में इस टेस्ट के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज अमृतसर, पटियाला, फरीदकोट, पीजीआई चंडीगढ़ और डीएमसी लुधियाना ही अधिकृत हैं।
एक्सपर्ट अलर्ट: सांस फूलने का इंतजार न करें
मामलों के बढ़ने के बीच डॉक्टरों ने लोगों को शुरुआती लक्षणों को हल्के में न लेने की चेतावनी दी है। फोर्टिस अस्पताल, जालंधर की इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. प्रीति सलहान कहती हैं, हर साल इस मौसम में अस्पतालों में एक ही पैटर्न देखने को मिलता है।
मरीज तेज बुखार, बदन दर्द, गले में खराश और न ठीक होने वाली खांसी के साथ आते हैं। लोग इसे आम वायरल समझकर खुद से दवा ले लेते हैं और 3-4 दिन इंतजार करते हैं। फिर जब सांस फूलने लगती है, तब वे इमरजेंसी में आते हैं। तब तक एच1एन1 संक्रमण फेफड़ों तक फैल चुका होता है।
वह बताती हैं,मेरे पास आए लगभग हर गंभीर मरीज ने यही कहा कि पहले 2-3 दिन लगा कि कुछ नहीं है। यही शुरुआती देरी तय करती है कि मरीज घर पर ठीक होगा या उसे ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ेगी।
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कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
मोदी चेस्ट क्लीनिक के एमडी डॉ. दीपक मोदी के अनुसार, अगर फ्लू के साथ ये लक्षण दिखें तो बिना एक मिनट गंवाए डॉक्टर से संपर्क करें:
- सांस लेने में तकलीफ या बहुत तेजी से सांस आना
- सीने में लगातार दर्द या दबाव
- होंठ या उंगलियों के पोरों का नीला पड़ना
- अचानक घबराहट, चक्कर आना या बेहोशी जैसा लगना
- डायबिटीज, हार्ट या अस्थमा जैसी पुरानी बीमारी का अचानक बिगड़ना
सबसे ज्यादा खतरा किसे है?
गर्भवती महिलाएं, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, डायबिटीज, हार्ट फेल्योर, अस्थमा, किडनी रोग से पीड़ित लोग और लंबे समय से स्टेरॉयड या इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं ले रहे मरीज। इनमें एच1एन1 बहुत तेजी से वायरल निमोनिया में बदल सकता है।
डॉक्टरों ने बचाव के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए हैं-
- हर साल का फ्लू शॉट एच1एन1 के मौजूदा स्ट्रेन से बचाव का सबसे असरदार तरीका है।
- एंटीवायरल दवाएं लक्षण शुरू होने के पहले 48 घंटों में सबसे ज्यादा असर करती हैं।
- हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धोएं।
- खांसते-छींकते समय मुंह-नाक को कोहनी या टिश्यू से ढकें।
- भीड़-भाड़ और बंद जगहों पर मास्क पहनें।
- बुखार होने पर घर पर ही रहें।
- खुद से एंटीबायोटिक लेने से बचें।
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