बीबीएमबी पानी विवाद में पंजाब को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की; हरियाणा को पानी देने का फैसला बरकरार
उच्च न्यायालय ने हरियाणा को पानी देने के मामले में पंजाब सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि ऐसे विवादों के समाधान के लिए केंद्र सरकार के पास ...और पढ़ें

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने पंजाब की याचिका खारिज की।
बीबीएमबी का हरियाणा को पानी देने का आदेश बरकरार।
जल विवादों के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करें।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े जल विवाद मामले में पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। यह याचिका पिछले वर्ष हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी दिए जाने के बीबीएमबी के आदेशों को चुनौती देते हुए दायर की गई थी।
पंजाब सरकार का मुख्य आरोप था कि बीबीएमबी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्णय लिया। राज्य की ओर से कहा गया कि बिना उसकी सहमति के हरियाणा को अतिरिक्त पानी देना न केवल स्थापित समझौतों के खिलाफ है बल्कि उसकी आपत्तियों को भी नजरअंदाज किया गया।
पंजाब ने अदालत को बताया कि तकनीकी समिति की बैठक में “द्विपक्षीय सहमति” की शर्त शामिल थी, जिसे बाद में हटा दिया गया और एकतरफा निर्णय लागू कर दिया गया। पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 79 के तहत बोर्ड के कार्य केवल प्रशासन, रखरखाव और संचालन तक सीमित हैं। इसके अलावा पानी और बिजली की आपूर्ति भी पूर्व समझौतों के अनुसार ही की जा सकती है।
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दलील- अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला
ऐसे में बिना सहमति के अतिरिक्त पानी छोड़ना न केवल नियमों के खिलाफ है बल्कि राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन भी है। पंजाब ने विशेष रूप से 23 अप्रैल 2025 की तकनीकी समिति की बैठक और 30 अप्रैल 2025 की बोर्ड बैठक के फैसलों को चुनौती दी। साथ ही बोर्ड ने हरियाणा को सीधे पानी की मांग (इंडेंट) भेजने की अनुमति देकर स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन किया।
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पंजाब सरकार ने यह भी कहा कि यह मामला केवल गलत निर्णय का नहीं बल्कि पूर्णत अधिकार क्षेत्र से बाहर का है, इसलिए वैकल्पिक उपाय (जैसे केंद्र सरकार के पास जाना) लागू नहीं होता और हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए।
सरकार ने अस्वीकार की दलील
हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले ही विस्तृत सुनवाई कर फैसला दिया जा चुका है। उस फैसले में यह कहा गया था कि यदि किसी राज्य को बीबीएमबी के निर्णय से आपत्ति है, तो वह नियमों के तहत केंद्र सरकार के समक्ष अपनी शिकायत रख सकता है।
कोर्ट ने दोहराया कि जल वितरण जैसे तकनीकी और नीतिगत मामलों में सीधे न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होता है और इसके लिए वैधानिक व्यवस्था पहले से मौजूद है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, न कि बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
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आपत्ति पर केंद्र को आवेदन दें
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जिस अवधि (मई-जून 2025) के लिए पानी छोड़ा गया था, वह अब समाप्त हो चुकी है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि पंजाब सरकार को अब भी बीबीएमबी के निर्णय पर आपत्ति है, तो वह नियम 7 के तहत केंद्र सरकार के पास आवेदन दे सकती है, जहां इस तरह के विवादों के समाधान की स्पष्ट व्यवस्था दी गई है।
इसी के साथ कोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा बोर्ड के कामकाज में हस्तक्षेप करने के खिलाफ अवमानना याचिका का भी यह कहते हुए निपटारा कर दिया कि इब इसका कोई औचित्य नहीं बनता।
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