मृत कर्मचारी की पत्नी ने मांगी पुरानी पेंशन, हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से मुफ्त योजनाओं का ब्योरा किया तलब
स्वर्गीय तारा सिंह के नियमितीकरण, पुरानी पेंशन और पारिवारिक पेंशन के दावे पर हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से योजनाओं और कल्याणकारी घोषणाओं का विस्तृत हलफनामा मांगा है।

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HighLights
हाई कोर्ट ने मृत कर्मचारी के परिवार को लाभ पर मांगा जवाब।
पंजाब सरकार को कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत ब्योरा देने का निर्देश।
नागरिकों को वित्तीय सहायता और मुफ्त सुविधाओं की जानकारी तलब।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक कर्मचारी स्वर्गीय तारा सिंह की सेवाओं के नियमितीकरण का मरणोपरांत लाभ, पुरानी पेंशन और उनकी पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने के दावे से जुड़ी याचिका पर पंजाब सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
अदालत ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल कर नागरिकों को वित्तीय सहायता और अन्य कल्याणकारी लाभ उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई योजनाओं, नीतियों और सरकार की ओर से की गई घोषणाओं का पूरा विवरण देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सात अक्टूबर 2026 को होगी।
याचिका में स्वर्गीय तारा सिंह की सेवाओं के नियमितीकरण का आवश्यक मरणोपरांत लाभ देने, उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान करने तथा याचिकाकर्ता नंबर एक को पारिवारिक पेंशन देने की मांग की गई है। इसके अलावा उसके पारिवारिक सदस्य नंबर को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति देने की मांग भी की गई है।
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जवाब के लिए राज्य सरकार ने मांगा समय
राज्य की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने राज्य को अगली सुनवाई से तीन दिन पहले अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने राज्य सरकार के वकील को एक हलफनामा दाखिल करने का विशेष निर्देश दिया। इसमें राज्य सरकार की ओर से नागरिकों को वित्तीय सहायता और अन्य कल्याणकारी लाभ उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई सभी संबंधित योजनाओं, नीतियों और की गई घोषणाओं का विवरण देने को कहा गया है।
हाई कोर्ट ने विशेष रूप से उन उपायों की जानकारी मांगी है, जिनके तहत नागरिकों को विभिन्न रूपों में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इनमें मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी की सुविधा, मुफ्त परिवहन और मासिक वित्तीय सहायता शामिल हैं।
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लोक कल्याणकारी नीतियों पर हाई कोर्ट सख्त
अदालत ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य नागरिकों की कठिनाइयों को कम करना और उनकी आजीविका को सुगम बनाते हुए उनके जीवन को कुछ आसान बनाना है। यह राज्य के एक कल्याणकारी राज्य के रूप में दायित्वों को आगे बढ़ाने के संदर्भ में है। अदालत के निर्देश के बाद मामले की सुनवाई सात अक्टूबर 2026 तक स्थगित कर दी गई।
