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    पंजाब के निजी स्कूलों पर सख्ती, पहली बार 50 हजार तो दूसरी बार 1 लाख जुर्माना; तीसरी गलती पर मान्यता रद

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 04:17 PM (GMT+05:30)

    पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों के लिए नया फीस नियमन लागू किया है। निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाने पर अतिरिक्त राशि लौटानी होगी। नियम तोड़ने पर जुर्माना ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    HighLights

    1. अतिरिक्त फीस वसूली पर स्कूलों को राशि लौटानी होगी।

    2. नियम उल्लंघन पर भारी जुर्माना, तीसरी बार में मान्यता रद्द।

    3. फीस रेगुलेटरी कमेटी स्कूलों के खातों की जांच करेगी।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर बड़ी कार्रवाई करते हुए नया फीस रेगुलेशन कानून लागू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को कहा कि पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने वाले सभी निजी स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को एक माह के भीतर वापस करनी होगी।

    इसके लिए हर जिले में डीसी की अध्यक्षता में फीस रेगुलेटरी कमेटी बनाई जाएगी, जो स्कूलों के खातों की जांच करेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार 50 हजार रुपये, दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि तीसरी बार स्कूल की मान्यता रद कर दी जाएगी। सरकार का दावा है कि इस कानून से राज्य के 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख विद्यार्थियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।

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    पंजाब के इतिहास में पहली बार हो रहा ऐसा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि फीस वृद्धि की गणना हर वर्ष बढ़ी हुई मूल फीस के आधार पर होगी। इस व्यवस्था के अनुसार तीन वर्षों में अनुमेय वृद्धि लगभग 17 से 18 प्रतिशत तक बनती है। इसके बाद जितनी भी अतिरिक्त फीस बढ़ाई गई होगी, वह पूरी राशि अभिभावकों को लौटानी पड़ेगी।

    उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल ने तीन साल में 25 प्रतिशत फीस बढ़ाई है तो अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि वापस करनी होगी। यह पंजाब के इतिहास में पहली बार होगा, जब निजी स्कूलों को अभिभावकों से अधिक वसूली गई फीस लौटानी पड़ेगी।

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    हर अनिवार्य रूप से लिए गए पैसे होंगे फीस

    मान ने कहा कि कानून में फीस की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। अभिभावकों से अनिवार्य रूप से लिया जाने वाला प्रत्येक भुगतान फीस माना जाएगा। केवल स्वैच्छिक गतिविधियों, जैसे शैक्षणिक या व्यावसायिक टूर में भाग लेने वाले विद्यार्थियों से लिया गया शुल्क इस दायरे में नहीं आएगा।

    उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल ट्यूशन फीस कम दिखाकर ट्रांसपोर्ट, बिल्डिंग, कंप्यूटर या अन्य मदों के नाम पर अलग-अलग खातों में राशि जमा कराते हैं, ताकि वास्तविक फीस छिपाई जा सके। अब स्कूलों के सभी खातों की फोरेंसिक ऑडिट कराई जाएगी और यह देखा जाएगा कि किसी ट्रस्ट, कंपनी या अन्य संस्था के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त राशि तो नहीं वसूली गई।

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    रेगुलेटरी कमेटी करेगी वित्तीय रिकार्ड की जांच

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक जिले में बनने वाली फीस रेगुलेटरी कमेटी स्कूलों के वित्तीय रिकार्ड की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर पिछले वर्षों के खातों की भी पड़ताल करेगी। समिति आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा करेगी तथा अभिभावकों से सीधे बातचीत कर वसूले गए शुल्क की जानकारी जुटाएगी।

    उन्होंने कहा कि जांच में अतिरिक्त वसूली साबित होने पर संबंधित स्कूलों को एक माह के भीतर राशि सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में लौटानी होगी। इसे अगले शैक्षणिक सत्र की फीस में समायोजित करने की अनुमति नहीं होगी।

    जल्द शुरू होगा ऑनलाइन पोर्टल

    सरकार जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू करेगी, जिस पर सभी निजी स्कूलों को अपनी मौजूदा फीस, पिछले वर्षों की फीस वृद्धि और संबंधित वित्तीय विवरण निर्धारित समय सीमा में अपलोड करना होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कई परिवार भारी फीस के कारण बच्चों की पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। सरकार का उद्देश्य शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना और निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाना है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ लाखों अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक और मानसिक बोझ को कम करेगा।

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