राष्ट्रीय खेल दिवस विशेष: पंजाब की मिट्टी से निकल रहे सितारे, कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा रहे मान
राष्ट्रीय खेल दिवस पर पंजाब के युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा सामने आती है। गांवों से निकले ये खिलाड़ी बैडमिंटन, क्रिकेट, तैराकी, हॉकी, एथलेटिक्स और बास्केटबॉल में चमक रहे हैं।

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HighLights
बैडमिंटन खिलाड़ी मान्या राहलहान ने राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते।
अर्जुन राजपूत का भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयन हुआ।
पांच वर्षीय फतेह सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मार्शल आर्ट गेम्स में स्वर्ण जीता।
जागरण संवाददाता, पंजाब टीम। पंजाब की खेल प्रतिभा सिर्फ इतिहास की उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी उसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। गांवों की पगडंडियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंच रहे युवा खिलाड़ी अपनी मेहनत, जुनून और प्रतिभा से प्रदेश के खेल भविष्य की तस्वीर बदल रहे हैं।
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की याद में हर वर्ष उनकी जयंती (29 अगस्त) पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस पर हम कुछ ऐसे युवा खिलाड़ियों की बात कर रहे हैं, जिनके प्रदर्शन से लगता है कि पंजाब के खिलाड़ियों का भविष्य उज्ज्वल है। किसी ने रैकेट और बल्ले से, किसी ने तैराकी में तो किसी ने हॉकी और बास्केटबॉल कोर्ट पर अपनी पहचान बनाई है।
मान्या के रैकेट से चमक रहे मेडल: जालंधर की युवा बैडमिंटन खिलाड़ी मान्या राहलहान अपनी शानदार उपलब्धियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की छात्रा और रूसी बैडमिंटन अकादमी की खिलाड़ी मान्या ने स्टेट टेनिस इंटरनेशनल चैलेंज में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
नेशनल गेम्स और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक उनके नाम है, जबकि स्कूल नेशनल गेम्स में वह स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। जूनियर ऑल इंडिया मिक्सड डबल्स में वह देश की नंबर एक और गर्ल्स डबल्स में दूसरे स्थान पर हैं। हाल ही में स्टेट रैंकिंग टूर्नामेंट में महिला डबल्स और मिक्सड डबल्स में स्वर्ण जीतने वाली मान्या इस वर्षों से स्टेट चैंपियन हैं।
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अर्जुन ने पहनी भारतीय टीम की जर्स: जालंधर के अर्जुन राजपूत का चयन भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ है। पंजाब की ओर से खेलते हुए उन्होंने कूच बिहार ट्रॉफी में सौराष्ट्र के खिलाफ शानदार 121 रनों की शतकीय पारी खेली।
पूर्व खिलाड़ी भूपिंदर सिंह को अपना आदर्श मानने वाले अर्जुन पंजाब अंडर-16 टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। बेंगलुरु स्थित हाई परफॉरमेंस कैंप के मैचों में उन्होंने 60 और 101 रनों की प्रभावशाली पारियां खेलीं। विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी मैचों में चार अर्धशतक लगाए।
ओजस अपनी रफ्तार से रच रहे इतिहास: लुधियाना के ओजस सूद छोटी उम्र में ही राष्ट्रीय तैराकी में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित 52वीं जूनियर नेशनल एक्वाटिक चैंपियनशिप में उन्होंने तीन पदक जीतकर इतिहास रचा।
ओजस ने 50 और 100 मीटर फ्री स्टाइल में रजत तथा 50 मीटर बैकस्ट्रोक में कांस्य पदक जीता। यह पहली बार था, जब पंजाब के किसी तैराक ने राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में तीन पदक हासिल किए। कोच माधव सूद के मार्गदर्शन में ओजस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रिंस दीप खेलों से हॉकी के मैदान तक बढ़ा रहे मान: पठानकोट के परोटा के गांव पौणन के 22 वर्षीय प्रिंस दीप सिंह किसान परिवार से निकलकर हॉकी के मैदान में अपनी अलग पहचान बनाई है। बचपन से ही हॉकी के प्रति जुनून रखने वाले प्रिंस पढ़ाई के बाद गांव के मैदान में नियमित अभ्यास करते रहे।
उनके पिता बलविंदर सिंह छोटी-बड़ी मजदूरी करते हैं, जबकि पूरा परिवार संयुक्त रूप से रहता है। अनुशासन और नियमित अभ्यास ने उनके खेल को निखारा और जिले का मान बढ़ाया।
सहनूर ने गांव से लगाई एशिया तक की दौड़: संगरूर के दिड़बा के गांव खडियाल की 16 वर्षीया सहनूर बावा ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से सफलता का मुकाम पाया है। हांगकांग में आयोजित अंडर-20 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सहनूर ने रिले रेस में स्वर्ण पदक जीतकर देश और पंजाब का नाम रोशन किया।
साधारण परिवार की सहनूर को बचपन से ही खेलों में गहरी रुचि थी। सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने अभ्यास और मेहनत का सिलसिला जारी रखा। उनकी प्रतिभा को पहचानकर कोच जसप्रीत सिंह ने उन्हें तराशा और अंतरराष्ट्रीय स्तर का एथलीट बनाने में अहम भूमिका निभाई।
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जयप्रीत बास्केटबॉल कोर्ट पर कर रहे दमदार प्रदर्शन: लुधियाना बास्केटबॉल अकादमी के जयप्रीत सिंह सिद्धू बास्केटबॉल कोर्ट पर दमदार प्रदर्शन कर रहे हैं। जयप्रीत ने हाल ही में संपन्न अंडर-18 एशिया कप बास्केटबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
इससे पहले वह श्रीलंका में आयोजित सब-अंडर-18 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे। मूल रूप से रट्टा से संबंध रखने वाले जयप्रीत ने लुधियाना अकादमी में प्रशिक्षण लेकर अपने खेल को निखारा।
नन्हे फतेह सिंह का आसमान सा हौसला: अमृतसर के पांच वर्षीय फतेह सिंह चॉकलेट-आइसक्रीम और खिलौनों की उम्र में स्केट्स पर गतका दिखाकर पंजाब के उज्ज्वल खेल भविष्य की उम्मीद बन रहे हैं। थाईलैंड के पटाया में आयोजित वर्ल्ड मार्शल आर्ट गेम्स-2026 में फतेह ने स्केट्स पहनकर गतका प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया।
श्री गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी फतेह रोजाना सुबह-शाम करीब दो-दो घंटे अभ्यास करते हैं। स्केटिंग के दौरान उनका संतुलन और हाथ-पैरों की बेहतरीन मूवमेंट देखकर परिवार ने उन्हें गतका का प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया।
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