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ED की जांच पर पंजाब में सियासत तेज, बिट्‌टू बोले- आरोप गलत हैं तो दस्तावेजों से जवाब दे सरकार

By Ramanjeet SinghEdited By: Anuj Sharma
Published: Thu, 20 Aug 2026 12:23 PM (IST)

भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की ईडी पर टिप्पणी को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ...और पढ़ें

पूर्व केंद्र राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू।

पूर्व केंद्र राज्य मंत्री रवनीत बिट्‌टू।

HighLights

  1. बिट्टू ने ईडी को राजनीतिक विरोधी बताने पर मान को घेरा।

  2. कहा, मुख्यमंत्री गंभीर आरोपों को राजनीतिक बताकर खारिज न करें।

  3. जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दें, सबूतों पर हो फैसला।

रमनजीत सिंह मणकू, चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से भेजे गए पत्र पर की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए भाजपा नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर गंभीर आरोपों को खारिज नहीं कर सकते।

रवनीत बिट्टू ने कहा-

ये आरोप किसी राजनीतिक दल या व्यवस्था से बाहर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा नहीं लगाए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक है। यदि एजेंसी ने पंजाब पुलिस से कोई जानकारी मांगी है या किसी विशेष मामले को लेकर सवाल उठाए हैं, तो मुख्यमंत्री को राजनीतिक बयानबाजी के जरिए मामले को निपटाने के बजाय सक्षम अधिकारियों को इसकी जांच करने देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अपनी सरकार या उससे जुड़े राजनीतिक लोगों के खिलाफ होने वाली हर जांच को बार-बार राजनीतिक रूप से प्रेरित बताना जवाब देने के बजाय और अधिक सवाल खड़े करता है।

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दस्तावेज सार्वजनिक करने की कही बात

बिट्टू ने कहा कि अगर सब कुछ झूठ है, तो तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दीजिए। अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो जांच से डरने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए। पंजाब की जनता को जांच एजेंसियों पर आरोप नहीं, जवाब चाहिए। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी और भी अधिक होती है कि वह सरकार के कामकाज से जुड़े सवालों का जवाब दे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दूसरों से जवाबदेही की मांग कर सकते हैं, लेकिन अपनी ही सरकार को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब देने से इनकार नहीं कर सकते। मुख्यमंत्री का पद जनता के प्रति जवाबदेही की मांग करता है।

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जांच का परिणाम सबूतों के आधार पर हो

उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन करने दिया जाना चाहिए और किसी भी जांच का परिणाम सबूत और कानून के आधार पर निर्धारित होना चाहिए।

यदि मुख्यमंत्री को लगता है कि आरोप निराधार हैं, तो जांच आगे बढ़ने दीजिए और सबूतों को सच सामने लाने दीजिए। राजनीतिक बयानबाजी किसी आधिकारिक जांच के सवालों का विकल्प नहीं हो सकती। सार्वजनिक पद को जांच और सवालों से बचने के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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