'सतलुज' फिल्म विवाद में हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- यह प्रॉक्सी पिटिशन; वापस लेनी पड़ी जनहित याचिका
ओटीटी मंच से पंजाबी फिल्म 'सतलुज' हटाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वापस ले ली गई। अदालत ने इसे प्रॉक्सी याचिका बताते ह ...और पढ़ें

फिल्म सतलुज का पोस्टर।
HighLights
हाई कोर्ट ने 'सतलुज' फिल्म की जनहित याचिका पर की सख्त टिप्पणी।
अदालत ने याचिका को 'प्रॉक्सी पिटिशन' कहकर वापस लेने को कहा।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट की टिप्पणी के बाद जनहित याचिका वापस ली।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 से पंजाबी फिल्म 'सतलुज' हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने वापस ले लिया। इसके बाद हाई कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उसे खारिज कर दिया।
मोहाली निवासी सरवन सिंह ने जनहित याचिका दायर कर फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है और फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाया जाना इस संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर जनहित याचिका पर गंभीर सवाल उठाए।
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अदालत ने की सख्त टिप्पणी
अदालत ने टिप्पणी की कि फिल्म के निर्माता स्वयं फिल्म पर लगाए गए प्रतिबंध या उसे हटाए जाने को चुनौती नहीं दे रहे हैं, ऐसे में कोई तीसरा व्यक्ति इस प्रकार की जनहित याचिका कैसे दायर कर सकता है। पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा-
हमें लगता है कि यह याचिका प्रॉक्सी पिटिशन है।
अदालत की इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि फिल्म निर्माता की ओर से शीघ्र ही इस मामले में अलग याचिका दायर की जाएगी। इसलिए वर्तमान जनहित याचिका को वापस लेने की अनुमति दी जाए।
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हाईकोर्ट ने खारिज की जनहित याचिका
इस आग्रह को स्वीकार करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की छूट प्रदान कर दी और इसके साथ ही जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा मामले में अब यदि फिल्म के निर्माता स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं तो फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के निर्णय की न्यायिक समीक्षा उस याचिका के आधार पर की जा सकेगी। फिलहाल, याचिकाकर्ता द्वारा याचिका वापस लेने के कारण हाई कोर्ट ने मामले में किसी भी संवैधानिक या कानूनी प्रश्न के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की।