मिट रही हैं अकाली दल और भाजपा की दूरियां; मिलने लगे गठबंधन के संकेत, अब सामाजिक रिश्तों की हो रही बात
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के बीच दूरियां कम हो रही हैं, जो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए संभावित गठबंधन का संकेत है। अश्वनी शर्मा जैसे ...और पढ़ें

अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)
HighLights
शिअद और भाजपा के बीच दूरियां कम हो रही हैं।
2027 विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन के संकेत।
नेताओं के बयानों से सामाजिक समझौते की पुष्टि।
कैलाश नाथ, जागरण, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के नेताओं के सुर अब एक दूसरे के प्रति नरम पड़ने लगे हैं। 2027 का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने का दावा करने वाली भाजपा भी अब शिअद के साथ गठबंधन के संकेत देने लगी है। पहले राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की ओर से नशा विरोधी यात्रा के दौरान फिरोजपुर में शिअद प्रधान सुखबीर बादल और भाजपा के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा डेरा ब्यास प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों की उपस्थिति में एक साथ दिखाई दिए।
अब अश्वनी शर्मा ने कहा है कि शिअद के साथ भाजपा का राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक समझौता था। इसे लेकर इस बात के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं कि 2027 के विधान सभा चुनाव में पांच वर्षों से अलग-अलग राजनीति करने वाली दोनों पार्टियां पुन: गठबंधन कर सकती है। यह कोई पहला मौका नहीं हैं जब दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की चर्चा चरम पर हो।
2024 के लोक सभा चुनाव से पहले भी दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की बात चली थी लेकिन सीटों को लेकर बात सिरे नहीं चढ़ पाई। जिसका नुकसान दोनों ही पार्टियों को उठाना पड़ा।
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2024 में अकाली दल एक सीट पर सिमटी
भाजपा जहां पंजाब में वोट फीसदी बढ़ाने के बावजूद अपना खाता नहीं खोल सकी। वहीं, शिरोमणि अकाली दल भी मात्र एक सीट पर सिमट कर रह गई। शिअद के साथ गठबंधन को लेकर भाजपा में भी दो मत थे। कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में गए नेता पुन: गठबंधन पर हमेशा ही जोर देते रहे। जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेता इसके हक में नहीं थे।
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शिअद के साथ सामाजिक रिश्ता था
यह पहला मौका हैं जब प्रदेश के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि शिअद के साथ सामाजिक रिश्ता था। गठबंधन तो बराबरी में होता है। इससे स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं कि दोनों ही पार्टियों के नेता गठबंधन को लेकर करीब आ रहे हैं। पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि 2027 में सरकार बनाने के लिए शिअद और भाजपा का गठबंधन जरूरी हैं।
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अगर यह गठबंधन नहीं होता हैं तो भाजपा 2027 क्या 2032 को भी भूल जाए। हालांकि कैप्टन के इस बयान को भाजपा ने तल्खी भरा माना था। जबकि शिअद भी लगातार भाजपा के प्रति सतर्कता बरत रही है। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जब बजट पेश किया तो सुखबीर बादल ने पंजाब के परिपेक्ष्य में सिरे से खारिज नहीं किया बल्कि यह कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र के सामने अपना पक्ष रखने में विफल रही।
वहीं, जेल से निकलने के बाद अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी सबसे पहले भाजपा के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ का धन्यवाद किया था। जिसके बाद से ही यह संकेत मिलने शुरू हो गए थे कि 2027 को लेकर दोनों पार्टियां पुराने गिले-शिकवे छोड़ कर एक साथ आ सकती है।