थर्मल प्लांट की राख कहां गई? हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा पूरा रिकॉर्ड, सड़क परियोजनाओं पर भी नजर
हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार, बिजली निगम और थर्मल प्लांटों से फ्लाई राख की मात्रा, उपयोग और सड़क परियोजनाओं में इस्तेमाल का पूरा विवरण मांगा है।

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HighLights
हाई कोर्ट ने फ्लाई राख के उपयोग पर जानकारी मांगी।
पंजाब सरकार, पीएसपीसीएल को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश।
सड़क निर्माण परियोजनाओं में राख के उपयोग की जांच।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सड़क निर्माण परियोजनाओं में थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई राख के उपयोग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार, पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) और राज्य के थर्मल पावर प्लांट से विस्तृत जानकारी तलब की है।
कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सभी संबंधित पक्षों को प्रत्येक प्लांट से उत्पन्न फ्लाई राख की कुल मात्रा तथा उसके उपयोग का पूरा विवरण रिकार्ड पर रखने का निर्देश दिया है। यह आदेश नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के समक्ष मुख्य प्रश्न यह उठा कि पावर प्लांट और थर्मल प्लांट से उत्पन्न राख का उपयोग क्या मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकार्ड से स्पष्ट होता है कि थर्मल और पावर प्लांट से उत्पन्न राख का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाना था, ताकि इससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
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राख इस्तेमाल के पुराने सरकारी निर्देश
हाई कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2016 से 2023 के बीच संबंधित निगमों को राख निशुल्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ 100 किलोमीटर तक उसका परिवहन भी निशुल्क उपलब्ध कराना अनिवार्य था। हालांकि वर्ष 2023 के बाद इस संबंध में नीति में बदलाव किया गया।
पीठ ने रिकार्ड पर उपलब्ध परिपत्रों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2016 से 2021 के दौरान सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के संबंध में यदि राख का उपयोग नहीं हो पाता था, तो शेष राख एनएचएआई को सक्षम प्राधिकारी के आदेशों के अनुरूप उपलब्ध कराई जानी थी।
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हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान पक्षकारों के बीच इस बात को लेकर विवाद सामने आया कि क्या राख का वास्तविक उपयोग नीति और लिए गए निर्णयों के अनुरूप किया जा रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादी की ओर से अदालत को बताया गया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निर्देशों का किसी प्रकार का उल्लंघन नहीं किया जा रहा है।
मामले की आगे सुनवाई से पहले हाई कोर्ट ने पीएसपीसीएल, राज्य के सभी संबंधित थर्मल पावर प्लांट और पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वे शपथपत्र के माध्यम से प्रत्येक प्लांट से उत्पन्न फ्लाई राख की कुल मात्रा, उसके उपयोग का तरीका, तथा उसे किस प्रकार और किन परियोजनाओं में उपयोग किया गया, इसका पूरा विवरण रिकार्ड पर प्रस्तुत करें। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित की है।
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