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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 15, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Punjab News: ‘रोटरी डिनर इन दी डार्क’ के माध्यम 50 दृष्टिहीनों को दी जाएगी स्कॉलरशिप, नेत्रहीन होंगे सशक्त

    By Jagran NewsEdited By: Shoyeb Ahmed
    Updated: Sun, 15 Oct 2023 09:26 PM (IST)

    पूर्व रोटेरियन दिवंगत अनीश भनोट ने दृष्टिहीनों को सशक्त करने के लिए अनूठे प्रयास शुरु किये हैं। रोटरी डिनर इन दी डार्क (आरडीआईडी) के अंतर्गत इस वर्ष क ...और पढ़ें

    ‘रोटरी डिनर इन दी डार्क’ के जरिए 50 को दृष्टिहीनों को मिलेगी स्कॉलरशिप
    ‘रोटरी डिनर इन दी डार्क’ के जरिए 50 को दृष्टिहीनों को मिलेगी स्कॉलरशिप

    HighLights

    1. पूर्व रोटेरियन दिवंगत अनीश भनोट द्वारा दृष्टिहीनों को सशक्त करने की दिशा में शुरु किये गये एक अनूठे प्रयास
    2. ‘रोटरी डिनर इन दी डार्क’ के माध्यम 50 को दृष्टिहीनों को दी जाएगी स्कॉलरशिप
    3. दिंवगत रोटेरियन अनीश भनोट द्वारा शुरु किये गये इस अभियान से असंख्य दृष्टिहीन हो चुके है सशक्त

    जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। रोटरी डिनर इन दी डार्क (आरडीआईडी) के अंतर्गत इस वर्ष के आयोजन के माध्यम से रोटरी शिवालिक चंडीगढ़ (आरसीएस) 25-25 हजार की पचास स्कॉलरशिप वितरित करेगी। इसकी घोषणा वर्ल्ड साईट डे (विश्व दृष्टि दिवस) के अवसर पर आरसीएस के अध्यक्ष डॉ एसएस मक्कड ने सेक्टर 7 स्थित सिप एंड डाईन में आयोजित रोटरी डिनर इन दी डार्क आयोजन के दौरान दी।

    रोटरी अब तक इसी आयोजन के गत आठ एडीशन के माध्यम से 45 लाख रुपये की एज्यूकेशन स्कॉलरशिप जुटा दृष्टिहीनों के करियर में उजाला प्रदान कर चुका है।

    रोटरी को मिले लगभग 200 स्कॉलरशिप

    डॉ मक्कड़ ने बताया कि इस बार रोटरी को लगभग 200 स्कॉलरशिप्स एप्लीकेशंस प्राप्त हुई है। आरडीआईडी के आयोजन से जुटी धनराशि के बाद रोटरी का पैनल आवेदको की आर्थिक स्थिति और काबिलयत के आंकलन आधार पर पचास स्कॉलरशिप वितरित करेगा।

    दृष्टिहीनो की टीम घुप अंधेरे वाले हॉल में कराया डिनर

    इससे पूर्व चंडीगढ़ ट्राईसिटी के दानवीरों ने आरडीआईडी का अनुभव प्राप्त किया। शिव शर्मा की अगुवाई में दृष्टिहीनो की टीम ने आये अतिथियों (डाईनर्स) को एक घुप अंधेरे वाले हॉल में डिनर करवाया। इसमें सभी को आभास करवाया कि नेत्रहीन व दृष्टिहीन अंधेरे के दायरे में रह कर अपना जीवन यापन कैसे करते हैं, फिर वे चाहे खाने का समय क्यों न हो। डाईनर्स के लिये भी यह अनुभव यादगर रहा और सभी को दृष्टिहीनों के संघर्षो के विषय में ओर गहनता से सोचने के लिये मजबूर कर गया।

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