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    सामूहिक दुष्कर्म को बताया गलतफहमी, हाई कोर्ट ने महिला को लगाया एक लाख रुपये का भारी जुर्माना

    Updated: Fri, 22 May 2026 02:42 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाकर बाद में उसे गलतफहमी बताने वाली महिला पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि ...और पढ़ें

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

    HighLights

    1. महिला पर सामूहिक दुष्कर्म के झूठे आरोप लगाने का आरोप।

    2. हाई कोर्ट ने महिला पर एक लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया।

    3. गंभीर आरोपों को गलतफहमी बताना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाकर बाद में उसे “गलतफहमी” करार देने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए शिकायतकर्ता महिला पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी जैसे गंभीर प्रावधानों का इस प्रकार इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इससे महिलाओं की गरिमा भी प्रभावित होती है।

    यह आदेश जस्टिस आलोक जैन ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने एफआईआर रद्द तो कर दी, लेकिन शिकायतकर्ता के आचरण पर तीखी टिप्पणी करते हुए उस पर एक लाख रुपये तथा आरोपित पक्ष की ओर से 10-10 हजार रुपये जुर्माना जमा कराने का निर्देश दिया।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पहले एक समन्वय पीठ ने दोनों पक्षों को संबंधित इलाका मजिस्ट्रेट/ट्रायल कोर्ट के समक्ष बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया था।

    इसके बाद पठानकोट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता पूरी तरह स्वेच्छा से और बिना किसी दबाव, डर या प्रलोभन के हुआ है। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने भी एफआईआर रद्द करने का विरोध नहीं किया।

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    देरी से दर्ज रिपोर्ट का कारण स्पष्ट नहीं

    जस्टिस आलोक जैन ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कई व्यक्तियों पर सामूहिक दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए, लेकिन घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपों की पुष्टि के लिए कोई चिकित्सीय साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं था। बाद में शिकायतकर्ता ने समझौता करते हुए कहा कि एफआईआर “गलतफहमी” के कारण दर्ज हुई थी।

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    अदालत ने टिप्पणी की कि इतने गंभीर आरोपों को “गलतफहमी” का परिणाम बताना स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शिकायतकर्ता ने कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए अधिकारियों को गुमराह किया और आरोपितों पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश की।

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    ऐसे मामलों में सख्ती जरूर 

    अदालत ने कहा कि इस प्रकार के “दु:साहस” महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे आरोपों से आरोपित व्यक्तियों की प्रतिष्ठा गंभीर रूप से प्रभावित होती है और बाद में शिकायतकर्ता का यह कहना कि मामला गलतफहमी में दर्ज हुआ था, उनके सम्मान को हुई क्षति को कम नहीं कर सकता।

    अदालत ने आदेश दिया कि शिकायतकर्ता एक माह के भीतर एक लाख रुपये जमा करे। यदि वह राशि जमा नहीं करती या आरोपितों पर उसकी ओर से राशि भरने का दबाव बनाती है, तो राज्य सरकार उसकी संपत्तियां और परिसंपत्ति अटैच कर भू-राजस्व बकाया की तरह वसूली करेगी।

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