फिरोजपुर नगर कौंसिल चुनाव में बड़ा सियासी उलटफेर, महिला पार्षद के बदले सुर से आखिरी वक्त में बदल गए समीकरण
फिरोजपुर नगर कौंसिल चुनाव से पहले हाई वोल्टेज सियासी घटनाक्रम देखने को मिला। विधायक देर से पहुंचे, तीन पार्षद अनुपस्थित रहे और कांग्रेस की महिला पार्ष ...और पढ़ें

चुनाव के बाद बाहर निकलते पार्षद।
HighLights
फिरोजपुर नगर कौंसिल चुनाव में हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा।
कांग्रेस पार्षद प्रेम रानी ने आप को दिया समर्थन।
पार्षदों की गैर-हाजिरी से चुनाव में बढ़ा सस्पेंस।
तरुण जैन, फिरोजपुर। फिरोजपुर नगर कौंसिल के प्रधान, वरिष्ठ उपप्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव से पहले गुरुवार को नगर कौंसिल परिसर में हाई वोल्टेज राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव प्रक्रिया दोपहर तीन बजे शुरू होनी थी, लेकिन निर्धारित समय तक सभी पार्षदों के उपस्थित नहीं होने से लंबे समय तक असमंजस की स्थिति बनी रही।
चुनाव शुरू होने से पहले हुई देरी और अंतिम समय में बदले राजनीतिक समीकरणों ने पूरे घटनाक्रम को बेहद दिलचस्प बना दिया। कांग्रेस के पार्षद दोपहर करीब पौने तीन बजे ही नगर कौंसिल कार्यालय पहुंच गए थे। इसके विपरीत विधायक रणबीर सिंह भुल्लर शाम करीब चार बजकर उन्नीस मिनट पर अपने पांच पार्षदों के साथ कमेटी घर पहुंचे।
इसके कुछ मिनट बाद आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी समर्थित पार्षद भी लगभग साढ़े चार बजे बैठक स्थल पर पहुंचे। पार्षदों के देर से पहुंचने के कारण चुनाव प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी।
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समय पर नहीं पहुंचे पार्षद
चुनाव प्रक्रिया की जिम्मेदारी संभाल रहे उपमंडल अधिकारी अभिषेक शर्मा ने दोपहर तीन बजे पहली बार और फिर लगभग तीन बजकर बीस मिनट पर दूसरी बार बैठक कक्ष से बाहर आकर पार्षदों को बैठक में शामिल होने की घोषणा की।
उन्होंने ऊंची आवाज में कहा कि यदि कोई पार्षद बाहर रह गया है तो वह तुरंत बैठक में पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कोई पार्षद यातायात जाम में फंस गया हो, इसलिए कुछ समय और प्रतीक्षा की जाएगी। हालांकि उनकी अपील के बावजूद कोई नया पार्षद बैठक कक्ष में नहीं पहुंचा। शाम करीब चार बजकर चालीस मिनट तक दो निर्दलीय पार्षद और बहुजन समाज पार्टी की एकमात्र पार्षद भी बैठक में नहीं पहुंची थीं।
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महिला पार्षद की नाराजगी से पलटा फैसला
इसी दौरान चुनावी माहौल उस समय पूरी तरह बदल गया, जब कांग्रेस की महिला पार्षद प्रेम रानी ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के प्रति नाराजगी जाहिर कर दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला, इसलिए वह नगर कौंसिल चुनाव में आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान करेंगी।
प्रेम रानी के इस बयान के बाद नगर कौंसिल की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई। राजनीतिक दलों के समर्थकों और स्थानीय नेताओं के बीच चुनावी गणित को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। माना जाने लगा कि इस फैसले से चुनाव परिणाम पर सीधा असर पड़ सकता है और अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
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पार्षदों की गैर-हाजिरी से बढ़ा सस्पेंस
बैठक शुरू होने तक तीन पार्षद अनुपस्थित रहे। इसके बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रधान, वरिष्ठ उपप्रधान और उपप्रधान पद के चुनाव की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई। पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर कौंसिल परिसर के बाहर विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी रही। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और परिसर में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
नगर कौंसिल चुनाव से पहले सामने आए इस राजनीतिक घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को नई दिशा दे दी है। कांग्रेस की महिला पार्षद के रुख बदलने और कई पार्षदों के निर्धारित समय तक अनुपस्थित रहने से चुनाव को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया। अब सभी की निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं, क्योंकि इन्हीं नतीजों से यह तय होगा कि नगर कौंसिल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी और बदले हुए राजनीतिक समीकरण आगे किस दिशा में बढ़ेंगे।