जालंधर में दोमोरिया पुल में भरा पानी, 50 लाख से तैयार हो रहे वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का काम रुका
जालंधर के दोमोरिया पुल में भारी बारिश के कारण 5-6 फीट पानी भर गया है। जिससे 50 लाख रुपये के वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का काम रुक गया है। ...और पढ़ें

दोमोरिया पुल के नीचे एकत्रित पानी।
HighLights
दोमोरिया पुल में 5-6 फीट पानी भरने से काम रुका।
50 लाख रुपये का वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ।
156 साल पुराने पुल का नवीनीकरण कार्य बाधित।
जागरण संवाददाता, जालंधर। जालंधर के दोमोरिया पुल में पानी भर जाने की वजह से 50 लाख रुपये से तैयार हो रहा वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का काम रुक गया है। दोमोरिया पुल के नीचे का रास्ता पहले ही 15 दिनों से काम के चलते बंद किया हुआ है, मगर अब तीन दिनोें से हो रही वर्षा के कारण नीचे पांच से छह फीट तक पानी भरा हुआ है।
ऐसे में जब तक पानी उतरता नहीं तब तक आगे का काम भी शुरू नहीं हो सकता। वहीं दूसरी तरफ इकहरी पुल की हालत भी खराब है, जहां पर गंदा पानी रेल लाइन के पास तक पहुंच चुका है। इन हालातों में वाहन चालकों के लिए अड्डा होशियारपुर फाटक के अतिरिक्त दोमोरिया पुल की तरफ से रेलवे ओवरब्रिज का ही रास्ता बचता है।
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अंग्रेजों के समय बना था पुल
बता दें कि 1870 में अंग्रेज हुकुमत के दौर में बना था यह दोमोरिया पुल। जिसकी छोटी-छोटी रिपेयरिंग होती रही, मगर इसके स्ट्रक्चर को नए सिरे से तैयार करने का काम 156 सालों में पहली बार हो रहा है। इसके अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व स्ट्रांग सीवरेज सिस्टम तैयार किया जा रहा है। जिसके कार्यों के चलते पहले से ही मार्ग को बंद किया हुआ है।
जिसे पूरे होेने में दो महीने का समय लगेगा, मगर वर्षा के दौरान पानी भर जाने की सूरत में समय अतिरिक्त भी लग सकता है। दूसरी तरफ रेल लाइनों के नीचे रखे जाने वाले कंक्रीट के स्पैन को काम भी उतना ही देरी से होगा। जिन्हें तैयार किए हुए चार से पांच महीने हो चुके हैं। जो रेलवे के पैट्रोल पंप के पास तैयार रखे हुए हैं। जहां पर जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन की सेकेंड एंट्री बनाई जानी है।
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50 लाख रुपये का है प्रोजेक्ट
दोमोरिया पुल के नीचे हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रोजेक्ट 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। ताकि जो पानी दोमोरिया पुल में भरता है वो सीधे जमींन में नीचे भेजा जा सके। जिसके लिए कुएं के रूप में खुदाई की जा रही है। खुदाई का काम पूरा हो जाने के बाद उसमें गोलाकार रिंग डाले जाएंगे और साध-साथ प्लास्टर करके उन्हें आपस में जोड़ दिया जाएगा। जिसके बाद सतह पर जालीदार ढक्कन लगा दिए जाएंगे।
जिससे उनके भीतर किसी प्रकार की कचरा न जाए और केवल पानी ही नीचे जाए। यह प्रोजेक्ट रेल लाइनों से 12 मीटर दूर लगाया जा रहा है। जिसमें पांच यूनिट लगेंगे। तीन यूनिट दमोरिया पुल की तीन तरफ से आने वाली पानी को पाइपों के जरिए ऊपर से ही नीचे भेजा जाएगा।
पुल में 10 से 15 फीसदी पानी सीवर का होता है, जबकि बाकी बारिश का पानी इस प्रोजेक्ट से जमीन में जाएगा। कंपनी की तरफ से तीन साल तक इस प्रोजेक्ट का आपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम भी करेगी। क्योंकि इन यूनिटों की सफाई जरूरी होती है।