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लुधियाना में किसानों का प्रदर्शन, मिनी सचिवालय के बाहर पक्का मोर्चा लगाया; मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे

Published: Sun, 30 Aug 2026 01:38 PM (IST)

लुधियाना में भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने मिनी सचिवालय के बाहर पक्का मोर्चा शुरू किया। किसान मांगें पूरी होने तक दिन-रात धरना जारी रखेंगे।

लुधियाना में एकत्रित हुए किसान।

लुधियाना में एकत्रित हुए किसान।

HighLights

  1. भारतीय किसान यूनियन ने लुधियाना मिनी सचिवालय पर पक्का मोर्चा शुरू किया।

  2. किसान भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करने और कर्ज माफी की मांग पर अड़े।

  3. मांगें पूरी होने तक धरना दिन-रात लगातार जारी रहेगा।

जागरण संवाददाता, लुधियाना। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की ओर से रविवार को लुधियाना के मिनी सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के बाहर पक्का मोर्चा शुरू कर दिया गया। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने तक धरना दिन-रात लगातार जारी रहेगा। दोपहर करीब 12 बजे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मौके पर पहुंचे और धरना शुरू किया।

किसान अपने साथ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन, पानी और धरने के लिए जरूरी सामान लेकर आए हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़क किनारे खड़ी की गई हैं और किसानों के अनुसार इससे यातायात प्रभावित नहीं हो रहा। धरने में शामिल किसानों के लिए भोजन, पानी और चाय-पानी की व्यवस्था भी की गई है। रात में बारिश की संभावना को देखते हुए तिरपाल आदि की व्यवस्था की गई है।

किसान नेता सुदागर सिंह घुड़ाणी ने कहा कि यह धरना 24 घंटे जारी रहेगा। किसान दिन-रात मौके पर मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन तक अपनी मांगों की आवाज पहुंचाने के लिए पक्का मोर्चा लगाया गया है।

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farmers protest

लुधियाना में एकत्रित हुए किसान।

अमेरिका से व्यापार समझौता रद्द करने की मांग

किसानों की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करना शामिल है। किसान नेताओं का कहना है कि इससे पंजाब की कृषि, फसलों, डेयरी कारोबार और इससे जुड़े उद्योगों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विदेशी कृषि उत्पादों की आमद बढ़ने से किसानों को नुकसान होने की आशंका जताई गई है।

किसानों ने भूमि पूलिंग नीति को रद्द करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस नीति के तहत किसानों की जमीन लेने की प्रक्रिया बंद होनी चाहिए।

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कर्ज माफी की भी रखी मांग

इसके अलावा किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग उठाई गई है। किसान नेताओं के अनुसार किसानों और मजदूरों पर करीब दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। उन्होंने बड़े औद्योगिक घरानों के कर्ज माफ किए जाने का हवाला देते हुए किसानों के कर्ज माफी की मांग की।

किसानों ने बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने, आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने और दिल्ली आंदोलन से जुड़े सभी मामले खत्म करने की मांग भी रखी। पराली से संबंधित किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी की गई है।

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