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    लुधियाना के रिहायशी प्लाटों पर धड़ल्ले से बन रहे होटल और पीजी; अब मानवाधिकार आयोग ने दिखाई सख्ती

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 12:37 PM (IST)

    लुधियाना के शहीद भगत सिंह नगर में रिहायशी प्लाटों पर होटल और पीजी चलाने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने नगर निगम और नगर सुधार ...और पढ़ें

    रिहायशी इलाकें में बनी दुकानें।

    रिहायशी इलाकें में बनी दुकानें।

    HighLights

    1. मानवाधिकार आयोग ने अवैध निर्माण पर लिया कड़ा संज्ञान।

    2. निगम कमिश्नर, ट्रस्ट अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई।

    3. रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों से ढांचा प्रभावित।

    जागरण संवाददाता, लुधियाना। लुधियाना के शहीद भगत सिंह नगर में रिहायशी प्लाटों पर कथित तौर पर होटल, पेइंग गेस्ट (पीजी) और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शिकायत मिलने के बाद मानवाधिकार आयोग ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त सहित नगर सुधार ट्रस्ट के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने निर्देश दिया है कि आगामी चार अगस्त को निर्धारित सुनवाई से एक सप्ताह पहले पूरी रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

    यह शिकायत अरविंद शर्मा की ओर से मानवाधिकार आयोग में दायर की गई है। शिकायत में कहा गया है कि नगर सुधार ट्रस्ट की 475 एकड़ योजना के तहत विकसित शहीद भगत सिंह नगर पूरी तरह रिहायशी क्षेत्र है। इसके बावजूद लंबे समय से यहां रिहायशी प्लाटों पर होटल, पीजी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह सब संबंधित विभागों की जानकारी में होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

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    ट्रस्ट से निगम तक शिकायत, कार्रवाई अधूरी

    शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगर सुधार ट्रस्ट के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने भी अपने रिहायशी भवन में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर रखी हैं। इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने पहले नगर सुधार ट्रस्ट से संपर्क किया। वहां से उन्हें बताया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ लोगों की प्लाट आवंटन प्रक्रिया रद्द की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगी।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, योजना नगर निगम को हस्तांतरित होने के बाद उन्होंने निगम के भवन शाखा अधिकारियों से भी कार्रवाई की मांग की, ताकि रिहायशी क्षेत्र का मूल स्वरूप बरकरार रखा जा सके। इसके बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद मामला स्थानीय निकाय विभाग, विभागीय निदेशक, सचिव, सतर्कता विभाग, मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक भी पहुंचाया गया, लेकिन कहीं से भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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    कागजी कार्रवाई से बर्बाद रिहायशी ढांचा

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कभी कार्रवाई हुई भी तो वह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रही। कई मामलों में केवल प्लाटों का आवंटन रद्द करने की बात कही गई, जबकि अवैध व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले वास्तविक संचालकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इलाके में चार से पांच मंजिला इमारतें, होटल, पीजी और अन्य व्यावसायिक इकाइयां तेजी से विकसित हो रही हैं।

    शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि अनियंत्रित व्यावसायिक निर्माण के कारण कॉलोनी का मूल रिहायशी स्वरूप प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से सीवरेज व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। अब मानवाधिकार आयोग की ओर से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होने की संभावना बढ़ गई है। चार अगस्त को होने वाली सुनवाई में इस पूरे मामले पर अगली कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।

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