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पंजाब में बिजली की मांग 16 हजार MW के पार, 10 में से 5 सरकारी थर्मल यूनिट ठप; घरेलू-इंडस्ट्री सप्लाई प्रभावित

Published: Wed, 02 Sep 2026 12:44 PM (GMT+05:30)

पंजाब में बिजली संकट गहराता जा रहा है। सरकारी थर्मल प्लांटों की पांच यूनिट बंद हैं, जबकि बढ़ती मांग पूरी करने के लिए पावरकाॅम महंगी बिजली खरीद रहा है।

ये प्रतिकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतिकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. पंजाब में बिजली की मांग 16,000 मेगावाट से अधिक।

  2. सरकारी थर्मल प्लांटों के 10 में से 5 यूनिट बंद।

  3. गर्मी और कृषि के कारण बिजली की मांग बढ़ी।

जागरण संवाददाता, पटियाला। पंजाब के तीनों सरकारी थर्मल प्लांटों में बिजली उत्पादन में कोई सुधार नहीं हुआ है। राज्य के रोपड़, लहरा मोहब्बत और गोइंदवाल साहिब, तीनों थर्मल प्लांटों के कुल दस यूनिटों में से पांच यूनिट अभी भी ठप पड़े हैं और इनसे कोई पावर जनरेशन नहीं हो रही है। हालात ऐसे हैं कि बाकी जो पांच यूनिट चल भी रहे हैं, उनमें से भी तीन यूनिट तो अपनी क्षमता से आधा से भी कम बिजली उत्पादन कर रहे हैं।

बंद पड़े पांच यूनिटों में से दो यूनिट रोपड़ के और तीन यूनिट लहरा मोहब्बत के हैं। रोपड़ प्लांट के कुल चार यूनिटों की पावर जनरेशन क्षमता कुल 840 मेगावाट है लेकिन यहां से पावरकाॅम को महज 200 यूनिट बिजली ही मिल रही है।

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लहरा मोहब्बत के चार यूनिट खराब

इसी तरह लहरा मोहब्बत के कुल चार यूनिटों की कुल क्षमता 920 मेगावाट है लेकिन इसके विपरीत यहां पावर जनरेशन 167 मेगावाट ही हो रहा है। तीसरे थर्मल प्लांट गोइंदवाल साहिब से पावरकाम को अवश्य 496 मेगावाट बिजली मिल रही है जबकि यहां कुल पावर जनरेशन क्षमता 540 मेगावाट है।

उधर राज्य में प्राइवेट सेक्टर के दोनों थर्मल प्लांटों, राजपुरा और तलवंडी साबो में बिजली उत्पादन की स्थिति बेहतर है। 1400 मेगावाट क्षमता वाले राजपुरा थर्मल प्लांट से जहां 1329 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है वहीं 1980 मेगावाट क्षमता वाले तलवंडी साबो प्लांट से 1676 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।

पड़ रही गर्मी, बढ़ रही मांग

पंजाब में पड़ रही गर्मी के बाद बिजली की मांग लगातार बढ़ने और उत्पादन में कमी के चलते बिजली संकट गहराता जा रहा है। अब तक घरेलू फीडरों तक सीमित बिजली कटौती का असर औद्योगिक फीडरों पर भी पड़ रहा है। बिजली की कमी को पूरा करने के लिए पंजाब स्टेट पावर काॅरपोरेशन लिमिटेड (पावरकाॅम) को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।

पावरकाम का सभी स्रोतो से कुल बिजली उत्पादन 5139 मेगावाट है जबकि साढ़े 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग को पूरा करने के लिए उसे केंद्रीय पूल से बिजली खरीद पर मुख्य तौर पर निर्भर करना पड़ रहा है।

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कृषि क्षेत्र में बढ़ रही मांग

बिजली की मांग बढ़ने के पीछे इस समय कृषि क्षेत्र की बढ़ी जरूरत प्रमुख कारण है। पिछले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में मोटरें चलाने की जरूरत बढ़ गई है। इससे कृषि क्षेत्र की बिजली खपत में इजाफा हुआ है।इसके अलावा वर्षा नहीं होने से तापमान और उमस बढ़ने के कारण घरेलू बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। गर्मी और उमस के चलते लोग कूलर, पंखे और एयर कंडीशनर का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।

उत्पादन हो रहा प्रभावित

लुधियाना में ढंडआरी इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान सतराम सिंह मक्कड़ ने कहा कि रात के समय पांच घंटे बिजली बंद रहने से कारखानों में उत्पादन चलाना मुश्किल हो गया है। कई इकाइयों में इस दौरान काम प्रभावित रहता है, जबकि दिन में होने वाली अतिरिक्त कटौती से भी उत्पादन की रफ्तार टूटती है।उन्होंने कहा कि उद्योगों में मशीनरी और उत्पादन प्रक्रिया को लगातार बिजली की जरूरत होती है।

बार-बार बिजली जाने से काम रोकना पड़ता है और सप्लाई बहाल होने के बाद उत्पादन सामान्य करने में भी समय लगता है। इससे उद्योगों के लिए तय समय पर ऑर्डर पूरा करना चुनौती बन रहा है। इंडस्ट्री पहले ही कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में लंबे और अनियमित बिजली कट उत्पादन लागत तथा कामकाज दोनों पर असर डाल रहे हैं। विशेष रूप से रात की शिफ्ट में काम करने वाली इकाइयों के लिए स्थिति अधिक मुश्किल है।

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