मिट्टी को चांदी बना दिया... बेटियों के सपने के लिए बेच दी जमीन, भीलवाड़ा की संध्या ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जीता रजत
भीलवाड़ा की 16 वर्षीय संध्या बिश्नोई ने अजरबैजान में अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। ...और पढ़ें
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राजस्थान की संध्या बिश्नोई ने विश्व कुश्ती में जीता रजत (फोटो- सोशल मीडिया)
HighLights
संध्या बिश्नोई ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
पिता ने बेटियों की कुश्ती ट्रेनिंग के लिए जमीन बेची।
संध्या ने चोटिल होने के बावजूद फाइनल में मुकाबला लड़ा।
जागरण संवाददाता, उदयपुर। आर्थिक तंगी के बावजूद बेटियों के सपनों को पंख देने वाले एक पिता की मेहनत आज विश्व पटल पर चमक रही है। राजस्थान के भीलवाड़ा की 16 वर्षीय पहलवान संध्या बिश्नोई ने अजरबैजान के बाकू में आयोजित अंडर-17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के 46 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है।
उनकी सफलता के पीछे पिता निर्मल बिश्नोई का संघर्ष है, जिन्होंने बेटियों की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने के लिए अपनी दो बीघा जमीन तक बेच दी।
भीलवाड़ा लौटने पर संध्या ने बताया कि वह चार वर्ष की उम्र से अखाड़े में अभ्यास कर रही हैं। बचपन में लड़कों के साथ कुश्ती लड़ते हुए उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने पोलैंड और रूस की पहलवानों को 10-0 से हराया, जबकि सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की खिलाड़ी को महज 30 सेकेंड में चित्त कर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल से पहले कान और कलाई में चोट लगने के बावजूद उन्होंने मुकाबला लड़ा और रजत पदक जीता।
फैक्ट्री मजदूर पिता निर्मल बिश्नोई ने कहा कि उनकी चारों बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। बड़ी बेटी गीतिका और छोटी बेटी सिद्धि भी राष्ट्रीय स्तर की पहलवान हैं। संध्या के कोच कल्याण मल का कहना है कि वह बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की धनी हैं और भविष्य में ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का माद्दा रखती हैं।