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जीवन के हर दुख-दर्द को दूर करेगी अजा एकादशी, अभी नोट करें सही डेट और शुभ मुहूर्त

Updated: Tue, 25 Aug 2026 09:49 AM (GMT+05:30)

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत 06 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, जो पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति प्रदान करता है।

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated)

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व (Picture Credit- AI Generated) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत किया जाता है और जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अजा एकादशी (Aja Ekadashi 2026) व्रत किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी पापों से छुटकारा मिलता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि सितंबर में अजा एकादशी व्रत कब किया जाएगा और इसका शुभ मुहूर्त क्या है।

अजा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Aja Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 06 सितंबर को सुबह 09 बजकर 59 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 07 सितंबर को सुबह 07 बजकर 33 मिनट पर होगी। उदया तिथि के अनुसार,
अजा एकादशी व्रत 06 सितंबर को किया जाएगा।

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 12 मिनट से 05 बजकर 57 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से 01 बजकर 32 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 03 बजकर 14 मिनट से 04 बजकर 06 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 31 मिनट से 07 बजकर 53 मिनट तक

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(Picture Credit- AI Generated) 

अजा एकादशी व्रत पारण का समय (Aja Ekadashi Vrat Paran Time)

एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। इस व्रत का पारण 07 सितंबर को सुबह 06 बजकर 43 मिनट से 09 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकेगा। इस मुहूर्त के दौरान किसी भी समय व्रत खोला जा सकता है।

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में अजा एकादशी का विशेष महत्व है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से सुख-शांति बनी रहती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर में या गरीब लोगों को अन्न, धन आदि चीजों का दान करने से जीवन में किसी चीज की कमी नहीं रहती और धन लाभ के योग भी बनते हैं।

एकादशी व्रत के नियम

  • इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
  • प्रभु को केवल सात्विक चीजों का ही भोग लगाएं।
  • एकादशी के दिन मन को शांत और एकाग्र रखें।
  • इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें।
  • मन में किसी के प्रति बुरे विचार न लाएं और क्रोध करने से बचें।
  • पूजा के समय पीले वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।