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भगवान विष्णु ने कृष्णावतार देवकी और वसुदेव के ही घर क्यों लिया जन्‍म?

Updated: Thu, 20 Aug 2026 10:02 AM (IST)

भगवान कृष्ण का देवकी और वसुदेव के घर जन्म उनके पिछले जन्मों की तपस्या और भगवान विष्णु के वरदान का परिणाम था। पृश्नि और सुतपा के रूप में उन्होंने कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप भगवान ने उन्हें तीन जन्मों तक पुत्र रूप में आने का वरदान दिया था।

देवकी और वसुदेव के घर ही क्यों हुआ भगवान कृष्ण का अवतार । (Picture Credit- AI Generated)

देवकी और वसुदेव के घर ही क्यों हुआ भगवान कृष्ण का अवतार । (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. देवकी-वसुदेव पिछले जन्म में पृश्नि-सुतपा दंपती थे।

  2. कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने वरदान दिया।

  3. भगवान तीन जन्मों में उनके पुत्र बने: पृश्निगर्भ, वामन, कृष्ण।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को भगवान विष्णु के अवतार के रूप में बताया गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंध के तीसरे अध्याय में भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ा विस्तृत वर्णन मिलता है। पद्म पुराण सहित अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी उनके अवतार से संबंधित कथाएं बताई गई हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के घर जन्म लेने का निर्णय कुछ विशेष कारणों से लिया था। इसके पीछे उनके पिछले जन्मों की तपस्या और भगवान से प्राप्त वरदान था। चलिए इस बारे में विस्‍तार से समझने का प्रयास करते हैं।

पिछले जन्म में कौन थे देवकी और वसुदेव?

धार्मिक कथा के अनुसार पिछले जन्म में देवकी और वसुदेव पृश्नि और सुतपा नाम के दंपती थे। दोनों भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे और उन्होंने भगवान को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी।

कहा जाता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हुए। भगवान को अपने सामने देखकर पृश्नि और सुतपा ने उनसे पुत्र रूप में प्राप्त होने की इच्छा व्यक्त की।

भगवान विष्णु ने दिया था वरदान

पृश्नि और सुतपा की भक्ति से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न हुए। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान ने उन्हें वरदान दिया कि वे तीन जन्मों में उनके पुत्र के रूप में प्रकट होंगे।

इस वरदान के कारण भगवान विष्णु का तीन अलग-अलग जन्मों में उनके पुत्र के रूप में आने का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। जब इस दंपती ने देवकी और वसुदेव के रूप में जन्म लिया तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में उनके घर अवतार लिया।

पहला जन्म: पृश्निगर्भ

मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने सबसे पहले पृश्नि और सुतपा के पुत्र के रूप में जन्म लिया। इस अवतार को पृश्निगर्भ नाम से जाना जाता है।

यह भगवान विष्णु के उस वरदान की पहली पूर्ति मानी जाती है, जो उन्होंने पृश्नि और सुतपा को दिया था

दूसरा जन्म: वामन अवतार

इसके बाद वही दंपती दूसरे जन्म में कश्यप और अदिति के रूप में जन्मे। इस जन्म में भगवान विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में वामन अवतार लिया।

वामन अवतार में भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। धार्मिक कथा के अनुसार तीन पग में उन्होंने पृथ्वी, आकाश और अन्य लोकों को नाप लिया था।

तीसरा जन्म: श्रीकृष्ण

तीसरे जन्म में पृश्नि और सुतपा का जन्म देवकी और वसुदेव के रूप में हुआ। अपने पुराने वरदान को पूरा करने के लिए भगवान विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का अवतार लिया।

भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की जेल में हुआ, जहां देवकी और वसुदेव को कंस ने बंदी बना रखा था। जन्म के बाद वसुदेव ने कृष्ण को गोकुल पहुंचाया, जहां उनका पालन-पोषण नंद और यशोदा के घर हुआ।

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