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एकादशी व्रत की शुरुआत कैसे हुई? जानिए देवी एकादशी और मुरा राक्षस की पौराणिक कथा

Published: Wed, 10 Jun 2026 07:09 PM (GMT+05:30)

एकादशी व्रत की शुरुआत कैसे हुई, देवी एकादशी कौन हैं और भगवान विष्णु से उनका क्या संबंध है? जानिए मुरा ...और पढ़ें

कैसे हुई एकादशी व्रत की उत्पत्ति? (AI-Generated Image)

कैसे हुई एकादशी व्रत की उत्पत्ति? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. एकादशी देवी का प्राकट्य भगवान विष्णु के तेज से हुआ था

  2. देवी ने मुरा नामक राक्षस का वध किया था

  3. भगवान विष्णु ने देवी को "एकादशी" नाम दिया

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है। हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि एकादशी व्रत की शुरुआत कैसे हुई और एकादशी देवी का जन्म कब हुआ?

पद्म पुराण (उत्तर खंड, एकादशी माहात्म्य) के अनुसार, प्राचीन समय में मुरा नाम का एक बहुत शक्तिशाली राक्षस था। उसने अपने ताकत और पराक्रम के दम पर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग लोक पर काबू पा लिया था। मुरा के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता देवराज इंद्र के नेतृत्व में भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव ने उन्हें भगवान विष्णु की शरण लेने की सलाह दी।

इसके बाद सभी देवता वैकुंठ पहुंचे और भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वस्त किया और गरुड़ पर सवार होकर मुरा के राज्य चंद्रावती की ओर प्रस्थान किया। वहां पहुंचकर उन्होंने राक्षसों की विशाल सेना का संहार कर दिया। आखिर में स्वयं मुरा युद्ध के मैदान में उतरा।

जब भगवान विष्णु और राक्षस में हुआ युद्ध

भगवान विष्णु और मुरा के बीच भयंकर युद्ध शुरू हुआ। यह युद्ध लंबे समय तक चलता रहा। लगातार युद्ध करने के कारण विष्णु जी कुछ समय के लिए विश्राम करने एक गुफा में चले गए। मुरा भी उनका पीछा करते हुए वहां पहुंच गया। उसने भगवान को विश्राम करते देखा और उन पर हमला करने का विचार बनाया।

उसी समय भगवान विष्णु के दिव्य तेज से एक अद्भुत और तेजस्वी देवी प्रकट हुईं। उनके हाथों में अनेक शस्त्र थे और उनका तेज असहनीय था। देवी ने मुरा को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ, लेकिन कुछ ही समय में देवी ने मुरा के सभी अस्त्र-शस्त्र नष्ट कर दिए और उसका वध कर दिया।

जब भगवान विष्णु जागे तो उन्होंने मुरा को मृत और उस दिव्य देवी को अपने सामने खड़ा पाया। देवी ने बताया कि उन्होंने ही राक्षस का वध किया है। भगवान विष्णु उनकी वीरता से अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा।

कैसे हुई एकादशी व्रत की शुरुआत?

तब देवी ने प्रार्थना की कि जिस दिन वे प्रकट हुई हैं, उस दिन जो भी भक्त श्रद्धा से व्रत करेगा, उसे पापों से मुक्ति, पुण्य और अंत में मोक्ष की प्राप्ति हो। भगवान विष्णु ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली। चूंकि, देवी का प्राकट्य कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि अर्थात एकादशी को हुआ था, इसलिए भगवान विष्णु ने उनका नाम "एकादशी" रखा। तभी से एकादशी व्रत की परंपरा शुरू हुई और यह तिथि भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाने लगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी एकादशी भगवान विष्णु की आंतरिक शक्ति और माता लक्ष्मी का ही एक स्वरूप हैं, जो अधर्म का नाश कर भक्तों का कल्याण करती हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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