परम एकादशी व्रत से पापों से मिलेगी मुक्ति, इन 4 कामों को करने से नष्ट हो जाएगा शुभ फल
परम एकादशी 12 जून 2026 को मनाई जाएगी, जिस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। इस व्रत का पूर्ण फल पाने और पापों से मुक्ति के लिए चावल, ता ...और पढ़ें

परम एकादशी के दिन नियम (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष में परम एकादशी मनाई जाती है। इस बार यह एकादशी 11 जून को (Parama Ekadashi 2026 Date) मनाई जाएगी। परम एकादशी हर तीन साल में एक बार आती है। इस दिन भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, परम एकादशी का व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही सभी पापों से छुटकारा मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन कुछ गलतियों को करने से साधक को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं।
ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि परम एकादशी (Parama Ekadashi Vrat Ke Niyam) के दिन किन कामों को करने से बचना चाहिए।

1. चावल और अन्न का सेवन- एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से व्यक्ति को अगला जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि मिलता है। इसलिए इस दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। एकादशी के दिन गेहूं, जौ, दालें और किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन किया जा सकता है।
2. तामसिक भोजन का प्रयोग- एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करें। तामसिक भोजन करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा और भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं।
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3. तुलसी के पत्ते तोड़ना- भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करने चाहिए, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी न तोड़ें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस गलती को करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और पूजा सफल नहीं होती है। इसलिए एकादशी से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें।
4. क्रोध करना और अपशब्द बोलना- एकादशी के दिन किसी पर क्रोध न करें। किसी के बारे में गलत न सोचें। किसी की निंदा न करें। ऐसा माना जाता है कि इन गलतियों को करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।