Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    भगवान विष्णु को करना है प्रसन्न? तो इस शुभ मुहूर्त में करें परम एकादशी व्रत का पारण

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 07:00 AM (IST)

    एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ...और पढ़ें

    कब है परम एकादशी (Picture Credit- AI Generated)

    कब है परम एकादशी (Picture Credit- AI Generated)

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत किया जाता है और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान किया जाता है। इससे साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (अधिक) मास के कृष्ण पक्ष में परम एकादशी व्रत किया जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि परम एकादशी व्रत का पारण न करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण जरूर करें। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि कब और कैसे करें परम एकादशी व्रत का पारण?

    parama ekadashi 2026 (1)

     

    परम एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Parama Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, परम एकादशी व्रत 11 जून को किया जाएगा।
    अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर
    अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर
    व्रत का पारण करने का समय- 12 जून को सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 08 बजकर 10 मिनट तक

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 42 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक
    अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक
    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से 02 बजकर 36 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 18 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक
    निशिता मुहूर्त - रात 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक

    खबरें और भी

    सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन

    यह भी पढ़ें- क्या आप जानते हैं कन्यादान जितना पुण्य देता है यह एक व्रत? देखें 10 महाव्रतों की लिस्ट

    व्रत पारण विधि

    • एकादशी व्रत का पारण द्वादशी के दिन करना चाहिए।
    • इस दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें।
    • गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।
    • इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की साधना करें।
    • सच्चे मन से मंत्रों का जप और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
    • प्रभु का सात्विक भोजन का भोग लगाएं।
    • जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।
    • द्वादशी के दिन अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान जरूर करना चाहिए। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
    • आखिर लोगों में प्रसाद बांटें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

    यह भी पढ़ें- एकादशी की रात करें ये गुप्त उपाय, मिटेंगे सारे कष्ट, घर आएगा खूब पैसा

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।