एकादशी समेत इन 6 मौकों पर भूलकर भी न करें अन्न का सेवन, माना जाता है बड़ा दोष
धर्मशास्त्र में 6 ऐसे अवसर बताए गए हैं जब अन्न का सेवन करना पाप माना गया है। जानिए ग्रहण, एकादशी और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों से जुड़े नियम। ...और पढ़ें
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इन अवसरों पर न खाएं अन्न (AI-Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी देवी देवाता और पर्व-उपवास का विशेष महत्व है। मान्यता है कि व्रत रखने से अपने आराध्य देवता की कृपा प्राप्त होती है। यही नहीं, अगर कोई व्यक्ति शुद्ध मन से उपवास करता है तो जीवन के कई कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्त खासकर एकादशी, शिवरात्रि, जन्माष्टमी और कई धार्मिक अवसरों पर श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं।
लेकिन, इस बात से कम लोग वाकिफ होंगे कि धर्मशास्त्रों में कुछ ऐसे विशेष अवसर भी बताए गए हैं, जब अन्न का सेवन करना दोषपूर्ण माना गया है।
महाभारत में एक श्लोक के माध्यम से छह ऐसे अवसरों का उल्लेख मिलता है, जिनमें अन्न खाने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इन नियमों का पालन न करने पर व्यक्ति को पाप का भागी माना जाता है।
रविन्दुग्रासे हरिजन्मकाले कन्यादाने द्विजभोजने च।
प्राणप्रयाणे हरिवासरे च यदन्नं भुंक्ते नरकं प्रयान्ति।।
- पहला अवसर सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण का होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान अन्न और भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि बीमार, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को इस दौरान किसी चीज की मनाही नहीं है और खाने की छूट भी दी जाती है।
- वहीं, दूसरा अवसर भगवान के जन्मोत्सव या अवतार दिवस से जुड़ा है। रामनवमी, नरसिंह जयंती, जानकी नवमी और हनुमान जयंती जैसे कुछ ऐसे पवित्र मौके हैं जिनपर अन्न की बजाय फलाहार करना ज्यादा शुभ माना जाता है।
- तीसरा है कन्यादान का मौका। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, विवाह में कन्यादान का संकल्प लेने वाले व्यक्ति को यह पवित्र काम पूरा होने से पहले अन्न ग्रहण करने से बचना चाहिए।
- चौथा मौका तब होता है जब किसी ब्राह्मण, संत या अतिथि को भोजन के लिए आप आमंत्रित करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, मेजबान को पहले अतिथि को भोजन कराना चाहिए और उसके बाद स्वयं भोजन करना चाहिए।
- पांचवां अवसर किसी भी व्यक्ति की मृत्यु या अंतिम संस्कार से जुड़ा माना गया है। अगर इस अवस्था में आप अन्न ग्रहण करते हैं तो आप पाप के बड़े भागीदार बन जाते हैं। इसलिए, ऐसी स्थिति में भोजन ग्रहण करने से बचने की सलाह दी गई है।
- छठा और सबसे अहम मौके की बात करें तो यह अवसर एकादशी का व्रत माना गया है। यह उपवास भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन अन्न का सेवन नहीं किया जाता। खासकर इस दिन चावल खाने की मनाही होती है। एकादशी पर श्रद्धालु फलाहार या व्रत के नियमों के अनुसार भोजन करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।