पुरी के जगन्नाथ मंदिर में उल्टी लटकी है एकादशी, रहस्य जानकर दंग रह जाएंगे आप
जगन्नाथ पुरी मंदिर में एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित नहीं, बल्कि पुण्य माना जाता है, जो देश के अन्य हिस्सों से विपरीत है। ...और पढ़ें
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जगन्नाथ पुरी में क्यों उल्टी लटकी है एकादशी? (Picture Credits - AI image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत के सबसे चमत्कारिक और रहस्यमयी तीर्थस्थलों में उड़ीसा के पुरी जगन्नाथ मंदिर का नाम सबसे पहले लिया जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि, भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के जीवन की दशा और दिशा दोनों बदल जाती है।
यहां तक कुंडली में स्थित ग्रहों की दशा में सुधार तक देखने को मिलता है। इस अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल से जुड़ा एक खास रहस्य है यह है कि, यहां एकादशी उल्टी लटकी हुई है।
जगन्नाथ धाम में एकादशी से जुड़ी खास परंपरा
पूरे भारतवर्ष में एकादशी के दिन बड़ी ही श्रद्धा के साथ व्रत का पालन किया जाता है। इस दिन अनाज खासतौर पर चावल का सेवन करना पूर्ण रूप से वर्जित माना जाता है, लेकिन जगन्नाथ पुरी में यह परंपरा बिल्कुल इसके विपरीत है।
यहां एकादशी के मौके पर भगवान जगन्नाथ को चावल का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा भक्तों को भी महाप्रसाद के रूप में चावल बांटा जाता है। सबसे हैरान कि बात यह है कि, पुरी जगन्नाथ में एकादशी के दिन चावल का सेवन करना पाप नहीं बल्कि पुण्य है। लेकिन ऐसा क्यों?

एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा
पुरी जगन्नाथ धाम में एकादशी से जुड़ी परंपरा के पीछे एक अनोखी कथा छिपी है, जो काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि, एक बार सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए पुरी पहुंचे। लेकिन जब वे मंदिर पहुंचे, तब तक प्रसाद खत्म हो चुका था। केवल एक पत्ते पर बासी चावल के दाने बचे थे, जिन्हें एक कुत्ता चाट रहा था। ब्रह्मा जी की भक्ति भगवान जगन्नाथ के प्रति इतनी सच्ची और निर्मल थी कि उन्होंने बिना किसी संकोच के उसी पत्ते में कुत्ते के साथ बैठकर चावल खाने लगे।
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तभी वहां पर एकादशी देवी प्रकट हुईं और कहा, आज एकादशी है और आप चावल खा रहे हैं, यह व्रत का उल्लंघन है। इतने में स्वयं भगवान जगन्नाथ प्रकट हुए और उन्होंने एकादशी से कहा कि, जहां सच्ची भक्ति है, वहां कोई नियम लागू नहीं होता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ ने घोषणा करते हुए कहा कि, मेरे महाप्रसाद पर किसी भी तरह के व्रत या तिथि का बंधन नहीं रहेगा। यहां भक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि नियमों को ।
उसी पल भगवान ने मंदिर के पीछे एकादशी को उल्टा लटका दिया।
तभी से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है कि, एकादशी तिथि के दौरान जहां चावल खाना माना होता है, वहीं पुरी में चावल खाया जाता है।
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जगन्नाथ पुरी में उल्टी एकादशी सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में जीवंत शक्ति का प्रतीक है। इस कथा के मुताबिक, भगवान के लिए सबसे बड़ा धर्म भक्तों की सच्ची भक्ति है। आज भी कई भक्त इस रहस्य को सच मानते हुए जगन्नाथ पुरी में एकादशी के दिन चावल का ग्रहण करते हैं।
भगवान के महाप्रसाद को लेकर एक खास विशेषता यह है कि, महाप्रसाद का सेवन हमेशा बैठकर किया जाता है। खड़े होकर महाप्रसाद खाना सही नहीं माना जाता है।
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