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    क्या निर्जला एकादशी व्रत में खा सकते हैं तरबूज, खरबूज और लीची जैसे फल? ज्योतिषाचार्य ने बताया सही नियम

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 01:04 PM (GMT+05:30)

    निर्जला एकादशी पर तरबूज, खरबूज जैसे रसीले फल खाने को लेकर ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा ने नियम बताए हैं। पूर्ण निर्जला व्रत में इन फलों का सेवन वर्जित है, क ...और पढ़ें

    निर्जला एकादशी व्रत में फल खाने के नियम जानें क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य (Picture Credit- AI Generated)

    निर्जला एकादशी व्रत में फल खाने के नियम जानें क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. पूर्ण निर्जला व्रत में रसीले फल खाना वर्जित है

    2. तरबूज, खरबूज में पानी अधिक, व्रत खंडित हो सकता है

    3. असमर्थता पर फलाहारी व्रत में फल खा सकते हैं

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में हर साल 24 एकादशी मनाई जाती हैं, जिसमें से निर्जला एकादशी सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। बिना अन्न-जल के किया जाने वाला यह व्रत साल भर भी सभी एकादशी का फल देता है। यही वजह है कि इसे महाव्रत भी माना जाता है। 

    इस व्रत को करने के दौरान कई सारे नियमों का पालन करना पड़ता है, लेकिन लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या आम व्रत की ही तरह इस दौरान भी फलों का सेवन कर सकते हैं या नहीं। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने ज्योतिषी से बात की और जाना क्या निर्जला एकादशी के दिन कर सकते हैं तरबूज, खरबूज और लीची जैसे फल खाने चाहिए या नहीं?

    निर्जला व्रत के नियम

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, निर्जला का मतलब बिना पानी के व्रत का संकल्प होता है। ऐसे में अगर आपने पूर्ण निर्जला व्रत का संकल्प लिया है, तो आप तरबूज, खरबूज या लीची जैसे फल नहीं खा सकते। शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी के दिन अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी जरूरी होता है। चूंकि तरबूज, खरबूज और लीची जैसे फलों में 90% पानी होता है, अतः इन्हें खाने से आपका 'निर्जला' व्रत खंडित हो जाएगा।

    असमर्थ होने पर क्या करें?

    इसके साथ ही एक बेहद जरूरी और व्यावहारिक नियम यह भी है कि धर्म कभी भी शरीर को जबरदस्ती कष्ट देने की बात नहीं कहता है। ऐसे में कुछ खास स्थितियों में आप व्रत के नियम हल्के कर सकते हैं-

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    • शारीरिक स्थिति का ध्यान: अगर तेज गर्मी, बीमारी, बढ़ती उम्र या किसी शारीरिक कमजोरी की वजह से आप बिना पानी के व्रत रखने में असमर्थ हैं, तो जबरदस्ती शरीर को कष्ट न दें।
    • संकल्प में बदलाव: ऐसी स्थिति में आप व्रत का संकल्प बदलकर इसे साधारण एकादशी फलाहारी व्रत की तरह रख सकते हैं। तब आप तरबूज, खरबूजा, लीची जैसे मौसमी फल, फलों का रस या दूध आराम से ले सकते हैं।
    • वर्जित खाद्य पदार्थ: फलाहारी व्रत रखते समय बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि व्रत में अनाज यानी गेहूं, चावल और नमक का सेवन भूलकर भी न करें।

    भगवान भाव देखते हैं, जबरदस्ती का कष्ट नहीं

    सरल शब्दों में कहें तो, अगर 'निर्जला' रहना है, तो इन रसीले फलों से पूरी तरह दूर रहें। नहीं तो, अगर शरीर साथ नहीं दे रहा हो, तो भगवान विष्णु का नाम लेकर फलाहार (फल और पानी) ग्रहण कर लें। भगवान हमेशा भक्त का भाव देखते हैं, जबरदस्ती का कष्ट नहीं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।