तुलसी को जल देना या बाल धोना, वरूथिनी एकादशी पर किन गलतियों से रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी?
साल 2026 में वरुथिनी एकादशी सोमवार 13 अप्रैल को मनाई जाएगी। प्रभु श्रीहरि की प्रिय होने के कारण एकादशी के दिन तुलसी का महत्व और भी बढ़ जाता है। ...और पढ़ें
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वरूथिनी एकादशी के नियम (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
एकादशी पर तुलसी को जल अर्पित न करें
इस दिन बाल धोने और चावल खाने से बचें
भगवान विष्णु के भोग में जरूर शामिल करें तुलसी दल
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादसी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी मोक्ष, सौभाग्य व पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी गई है। इस दिन व्रत करना और विधि-विधान से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करना शुभ माना गया है। ऐसे में घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए एकादशी पर इन विशेष नियमों का ध्यान जरूर रखें।
न करें ये गलतियां
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी तिथि पर माता तुलसी, भगवान विष्णु के निमित्त निर्जला व्रत रखती हैं। ऐसे में इस दिन भूल से भी तुलसी में जल अर्पित न हीं करना चाहिए, अन्यथा इससे तुलसी माता का व्रत खंडित हो सकता है।
- एकादशी पर तुलसी दल तोड़ने से बचना चाहिए। ऐसे में आप पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले यानी द्वादशी तिथि पर ही तोड़कर रख सकते हैं।
- एकादशी के दिन बाल धोने की भी मनाही होती है। वहीं कुछ लोग इन दिन पर कंघी भी नहीं करते, क्योंकि एकादशी के दिन बालों का टूटना शुभ नहीं माना जाता।
- एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
- एकादशी की पूजा में काले रंग के कपड़े न पहनें, क्योंकि यह नकारात्मकता को बढ़ावा देता है।
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जरूर करें ये काम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए एकादशी पर उनके भोग में तुलसी दल शामिल करना न भूलें। एकादशी पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। ऐसा करने से विष्णु जी की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है।
करें भगवान विष्णु के मंत्रों का जप
1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
2. विष्णु भगवते वासुदेवाय मन्त्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

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करें इन चीजों का दान
शास्त्रों में माना गया है कि वरूथिनी एकादशी पर दान करने से 10,000 वर्ष की तपस्या के समान फल मिलता है। ऐसे में इस दिन पर आप अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, जल, वस्त्र, तिल और गाय का दान कर सकते हैं। इससे साधक को विष्णु जी कृपा प्राप्त होती है, जिससे पापों से मुक्ति मिलती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही इस तिथि पर गरीबों को भोजन कराना और दीप दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
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