ऐसे खोलेंगे व्रत तो सभी पापों से मिलेगी मुक्ति, क्या है वरूथिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त?
वरूथिनी एकादशी व्रत का विधिपूर्वक पारण करने और दान करने से भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभ ...और पढ़ें
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वरूथिनी एकादशी व्रत पारण की विधि (Pic Credit-AI Generated)
HighLights
वरूथिनी एकादशी व्रत 13 अप्रैल 2026 को है।
व्रत का पारण 14 अप्रैल को सुबह 06:54 से 08:31 तक।
विधिपूर्वक पारण और दान से पापों से मुक्ति मिलती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी व्रत (Kab Hai Varuthini Ekadashi 2026) किया जाएगा। यह तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद शुभ मानी जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सभी सुख मिलते हैं। ऐसा माना जाता है कि एकादशी व्रत का पारण न करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति नहीं होती है।
इसलिए कहा जाता है कि द्वादशी तिथि पर एकादशी व्रत का पारण जरूर करें और गरीबों या मंदिर में विशेष चीजों का दान करें। इससे सभी पापों से छुटकारा मिलेगा। चलिए जानते हैं वरूथिनी एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें।
वरूथिनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार 13 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी मनाई जाएगी और व्रत का पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा।
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 13 अप्रैल को रात 01 बजकर 16 मिनट पर
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 14 अप्रैल को रात 01 बजकर 08 मिनट पर
खबरें और भी
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 13 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 44 मिनट से 07 बजकर 07 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक
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वरूथिनी एकादशी 2026 पारण समय (Varuthini Ekadashi 2026 Vrat Paran Time)
14 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी व्रत का पारण करने का समय सुबह 06 बजकर 54 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।
वरूथिनी एकादशी व्रत पारण विधि (Varuthini Ekadashi Vrat Paran Vidhi)
- द्वादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- मंदिर की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें।
- देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
- प्रभु से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
- मंत्रों का जप और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- सात्विक भोजन का भोग लगाएं। भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
- इसके बाद लोगों में प्रसाद बांटें और आखिरी में स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।
करें इन चीजों का दान (Varuthini Ekadashi Daan)
वरूथिनी एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन पूजा-अर्चना करने के बाद अन्न, धन और वस्त्र समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और जीवन में कोई कमी नहीं होती है।
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