साल का सबसे गर्म समय 'अग्नि नक्षत्र' शुरू, इस दौरान इन कामों को करने की होती है सख्त मनाही
अग्नि नक्षत्र 2026 की शुरुआत 4 मई यानी आज से हो गई है। जानें क्या है अग्नि नक्षत्र, क्यों इस दौरान बढ़ जाती है भीषण गर्मी और इस समय किन शुभ कार्यों को ...और पढ़ें

अग्नि नक्षत्र 2026 में क्या करें क्या नहीं?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि गर्मियों के कुछ दिन बाकी दिनों की तुलना में इतने ज्यादा गर्म और कष्टकारी क्यों होते हैं? ज्योतिष शास्त्र में इस भीषण गर्मी वाले समय को 'अग्नि नक्षत्र' कहा जाता है। यह वह समय है जब सूर्य देव अपनी पूरी प्रचंडता और रौद्र रूप के साथ धरती को तपाते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अग्नि नक्षत्र की शुरुआत 4 मई यानी आज से हो गई है, जो 28 मई तक जारी रहेगी। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे वातावरण में भयंकर तपन महसूस होती है।
क्या होता है अग्नि नक्षत्र?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब ग्रहों के राजा सूर्य देव मेष राशि से वृषभ राशि की ओर प्रस्थान करते हुए कृतिका नक्षत्र के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, तब उस विशेष कालखंड को 'अग्नि नक्षत्र' कहा जाता है। चूंकि, कृतिका नक्षत्र के अधिपति स्वयं 'अग्नि देव' को माना गया है, इसलिए सूर्य के इस गोचर के दौरान तापमान में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। सूर्य और अग्नि का यह मिलन धरती पर लू (Heat wave) के प्रभाव को चरम पर पहुंचा देता है और प्रकृति का मिजाज पूरी तरह गर्म हो जाता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में अग्नि नक्षत्र का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दौरान भगवान शिव के पुत्र भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की आराधना करना अत्यंत फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान कार्तिकेय जी की स्तुति करने से जीवन के सभी संताप दूर होते हैं। गर्मी से राहत और मानसिक शांति के लिए भक्त इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना और ध्यान का सहारा लेते हैं। इस समय जल का दान करना सबसे बड़ा महापुण्य माना गया है। राहगीरों को ठंडा पानी या शरबत पिलाने से कुंडली के दोष शांत होते हैं।
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अग्नि नक्षत्र में क्या न करें (सावधानियां)
ज्योतिष शास्त्र और स्वास्थ्य की दृष्टि से इस अवधि के दौरान कुछ कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है:
- मान्यताओं के अनुसार, इस काल में विवाह, मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश और उपनयन संस्कार (जनेऊ) जैसे मांगलिक कार्य टाल देने चाहिए।
- किसी नए व्यवसाय, दुकान का उद्घाटन या महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता।
- दोपहर की तेज धूप में घर से निकलने से बचें और अनावश्यक लंबी यात्राओं से परहेज करें।
क्या करें जिससे बना रहे स्वास्थ्य?
चूंकि यह समय अग्नि तत्व की प्रधानता वाला है, इसलिए शरीर को ठंडा रखना बहुत जरूरी है।
- सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें।
- सात्विक, हल्का और सुपाच्य भोजन करें।
- पानी, नारियल पानी, लस्सी और मौसमी फलों के जूस जैसे तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
- पक्षियों के लिए छतों पर मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर जरूर रखें।
- बेजुबान जानवरों की प्यास बुझाने का प्रबंध करें।
इन उपायों से न केवल सेहत अच्छी रहेगी, बल्कि आपको ईश्वर की विशेष कृपा और अमोघ पुण्य भी प्राप्त होगा।
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