शरीर के रोग से लेकर असफलता तक: अपने स्वभाव और लक्षणों से करें कमजोर ग्रहों की सीधी पहचान
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जीवन में आने वाली समस्याओं के पीछे ग्रहों की कमजोर स्थिति हो सकती है। बिना कुंडली ...और पढ़ें

बिना कुंडली देखें लक्षणों से करें कमजोर ग्रहों की पहचान

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर किसी में कुछ अच्छी आदतें तो कुछ बुरी आदतें भी होती हैं, जो उनके जीवन पर किसी न किसी तरह से असर दिखाती है। बहुत से लोग मेहनती होने के बाद भी बार-बार कार्य में असफल होते हैं।
कुछ लोगों को प्यार और करियर में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वैसे तो जीवन में आने वाली समस्याओं के पीछे कई कारण और आदतें हो सकती हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र इसे अलग नजरिए से देखता है।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कुंडली में ग्रह अच्छे या बुरे असर अपने स्थान के मुताबिक देते हैं। अगर जीवन में किसी भी तरह की समस्या सता रही है और उसका ज्योतिषीय समाधान पाने की इच्छा रखते हैं, तो यह पता करना बेहद जरूरी है कि आपकी परेशानी किस ग्रह के कारण है। आइए जानते हैं जन्म कुंडली देखे बिना ग्रहों के असर को कैसे पहचानें?
सूर्य को कैसे पहचानें?
अगर आप बिना कुंडली देखे जानना चाहते हैं कि, सूर्य कमजोर या मजबूत तो इन लक्षणों से पहचान सकते हैं। अगर सुबह उठने का मन न करे, चेहरे पर उदासी दिखाई दे, आत्मविश्वास की कमी महसूस हो या बार-बार सिरदर्द और आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगें, तो इसका अर्थ है कि कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर है।
चंद्रमा से जुड़े लक्षण
अगर आपको नींद आने में बार-बार परेशानी का सामना करना पड़े या छोटी-छोटी बातों पर रोने का मन करें या मन में हमेशा बेचैनी बनी रहे और मन की भावनाएं अस्थिर हो तो इसका अर्थ है कि, आपका चंद्रमा कमजोर है।
मंगल की पहचान कैसे करें?
अगर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगे, बार-बार विवाद या झगड़े की स्थिति दिखाई दे, चोट लगने की घटनाएं बढ़ने लगे या शरीर पर खून या सूजन से जुड़ी समस्याएं सताने लगे तो यह मंगल के कमजोर होने का संकेत है।
बुध से जुड़े लक्षण
यदि भूलने की आदत बढ़ने लगे, बिना सोचे-समझे निर्णय या अपनी बातों को बेहतर तरीके से पेश न कर पाना, स्किन और नसों से जुड़ी समस्याएं सताने लगे तो इसे बुध के कमजोर या असंतुलित होने का संकेत माना जाता है।
गुरु से जुड़े लक्षण
यदि वजन बढ़ने लगे, पाचन या लिवर से जुड़ी समस्या सताने लगे, शरीर में सुस्ती और आलस रहे, बच्चों से दूरी महसूस होने लगे या पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों में मन लगना बंद हो जाए, तो इसे गुरु के कमजोर या असंतुलित होने का संकेत माना जा सकता है।
शुक्र
अगर पति-पत्नी में बार-बार विवाद होने लगे, साफ-सफाई की कमी दिखाई दे, गंदे या अस्त-व्यस्त कपड़े पहनने की आदत बढ़ती चले जाए अथवा प्रजनन औ मूत्र तंत्र से जुड़ी समस्याएं सताने लगें, तो इसे शुक्र के कमजोर होने का संकेत माना जा सकता है।
शनि
यदि पैरों में हमेशा दर्द की शिकायत रहने लगे, जोड़ों, हड्डियों या दांतों से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगे, लंबे वक्त तक शारीरिक कमजोरी महसूस होने लगे या बार-बार काम में देरी होने लगे तो इसे शनि के कमजोर होने का संकेत माना जा सकता है।
राहु
यदि मन में लगातार संदेह, डर बना रहे या अचानक से भ्रम और बेचैनी की स्थिति बन जाए या रात में बार-बार फोन चेक करने या गलत आदतों की प्रवृत्ति बढ़ जाए तो इसका मतलब राहु कमजोर हो सकता है।
केतु
यदि सब कार्य पूर्ण होने के बाद भी मन में संदेह बना रहे, अचानक सेहत बिगड़ जाए, मानसिक अस्थिरता महसूस हो या किसी भी कार्य में मन लगना बंद हो जाए या भौतिक वस्तु के आदि हो जाए, तो इसे केतु के कमजोर होने का संकेत माना जा सकता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
