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    क्या आप भी अमावस्या पर खरीदने वाले हैं नया फर्नीचर? पहले जान लें पंचक का ये अशुभ संयोग

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 11:28 AM (IST)

    वैशाख अमावस्या पर पंचक का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। इस दौरान क्या करें क्या नहीं आइए जानते हैं। ...और पढ़ें

    पंचक के साये में न करें ये काम

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में तिथियों और नक्षत्रों के मेल का बहुत बड़ा महत्व होता है। कभी-कभी कुछ ऐसे संयोग बनते हैं, जो शुभ कार्यों के लिए बेहतर नहीं माने जाते। ऐसा ही एक संयोग वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) पर बन रहा है। दरअसल, 'पंचक' का साया इस तिथि पर पड़ने वाला है।

    अक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसे काम कर बैठते हैं, जिनका बुरा असर हमारे जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार, जब अमावस्या और पंचक एक साथ होते हैं, तो कुछ खास सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं आखिर इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए और क्यों।

    कब से कब तक है पंचक?

    हिंदू पंचांग के अनुसार, अप्रैल महीने के पंचक की शुरुआत सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को सुबह लगभग 03:44 बजे से हो चुकी है। यह पंचक शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को दोपहर 12:02 बजे समाप्त होगा। 17 अप्रैल को ही अमावस्या भी है।

    पंचक और अमावस्या का मेल क्यों है भारी?

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक के नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) का मेल जब सोमवार से होता है, तो वह बेहद फलदायी बन जाता है और उसे 'राज पंचक' कहा जाता है। इसे पांच गुना फल देने वाला माना गया है, यानी इस दौरान अगर कोई अशुभ काम होता है, तो उसकी आवृत्ति पांच बार हो सकती है। अमावस्या की तिथि पहले ही पितरों और शांति कार्यों के लिए मानी जाती है, ऐसे में पंचक का साथ होना कुछ कामों के लिए वर्जित है।

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    (Image Source: AI-Generated)

    भूलकर भी न करें ये 5 काम

    1. नए और शुभ कार्य की शुरुआत

    अगर आप किसी नए बिजनेस की शुरुआत करने जा रहे हैं या घर में कोई मांगलिक कार्य (जैसे सगाई या गृह प्रवेश) की सोच रहे हैं, तो इस समय ठहर जाना ही बेहतर है। माना जाता है कि पंचक में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं और वह काम लंबे समय तक अटक सकता है।

    2. दक्षिण दिशा की यात्रा

    शास्त्रों के अनुसार, दक्षिण दिशा को यम (मृत्यु के देवता) की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करना बहुत ही अशुभ माना जाता है। बुजुर्गों का कहना है कि अगर बहुत जरूरी न हो, तो इस दिशा में सफर करने से बचना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

    3. लकड़ी का सामान खरीदना या इकट्ठा करना

    पंचक के दौरान लकड़ी खरीदना, उसे इकट्ठा करना या घास-फूस से जुड़ा काम करना वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान लकड़ी का संचय करने से अग्नि का भय बना रहता है और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।

    4. नया बिस्तर या पलंग न लें

    अगर आप नया बेड, गद्दा या पलंग खरीदने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए। ज्योतिषीय मान्यताओं (नारद पुराण और मुहूर्त ग्रंथों के आधार पर) के अनुसार, पंचक के समय बिस्तर या चारपाई बनवाना या खरीदना घर में बीमारी और अशांति को बुलावा दे सकता है।

    5. घर की छत डलवाने का काम

    घर के निर्माण की शुरुआत पंचक में न करें। यही नहीं, घर की छत पंचक में डलवाना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने पर घर में हमेशा नकारात्मकता रहती है। साथ ही, तरक्‍की में तमाम तरह की बाधाएं आती हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।