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    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर महासंयोग! इन राशियों के लिए खुलेंगे किस्मत के द्वार, खुशियों से भर जाएगा घर-आंगन

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 06:01 PM (IST)

    सनातन धर्म में विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2026 Yoga) का खास महत्व है। विजया एकादशी के दिन कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी ...और पढ़ें

    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का धार्मिक महत्व

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 13 फरवरी को विजया एकादशी है। यह पर्व हर साल फाल्गुन महीने में शिवरात्रि से पहले मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक के जीवन में शुभ और मंगल का आगमन होता है। साथ ही जाने-अनजाने में किए गए समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

    ज्योतिषियों की मानें तो विजया एकादशी से एक दिन पहले मन के कारक चंद्र देव अपनी चाल बदलेंगे। सोम देव के चाल बदलने से कई राशि के जातकों को फायदा होगा। इन राशियों के जीवन में खुशियां दस्तक देंगी। साथ ही शुभ कामों में सफलता मिलेगी। आइए, इन राशियों के बारे में जानते हैं-

    वृश्चिक राशि

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    वृश्चिक राशि के जातकों को विजया एकादशी के दिन सभी प्रकार के अधूरे और अटके काम में सफलता मिल सकती है। किसी मनोकामना के पूर्ण होने से मन प्रसन्न रहेगा। कारोबार संबंधी परेशानी दूर हो सकती है। अटका पैसा मिलने से विषय विशेष की परेशानी दूर होगी। गिले-शिकवे दूर होंगे। घर में खुशियों का माहौल रहेगा। शुभ कामों में सफलता मिल सकती है। आय के नवीन साधन बनेंगे। विजया एकादशी पर भक्ति भाव से लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय उन्हें चावल की बनी खीर अर्पित करें।

    कुंभ राशि

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    विजया एकादशी के दिन कुंभ राशि के जातकों की भी किस्मत चमक सकती है। कुंभ राशि के जातक को करियर और कारोबार संबंधी कोई बड़ी गुड न्यूज मिल सकती है। धन संबंधी परेशानी दूर हो सकती है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। किसी भी प्रकार के निवेश का आपको लाभ मिलेगा। कारोबार में तेजी आएगी। किसी अपने से मदद मिल सकती है। आत्मविश्वास बढ़ेगा। तनाव और चिंता से मुक्ति मिलेगी। विजया एकादशी के दिन विधिवत लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के समय लक्ष्मी नारायण जी को श्रीफल अर्पित करें। साथ ही पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें।

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    मंत्र

    • ॐ नमोः नारायणाय नमः।
    • ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।
    • ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:
    • ऊँ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।
    • ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:। ।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।