शनि छल्ला धारण करने के नियम, जानें किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं?
वैदिक ज्योतिष में शनि छल्ला धारण करने के नियम बताए गए हैं, जिसमें कुंडली की जांच और ग्रहों की स्थिति महत्वपूर्ण है। जानिए किसे धारण करनी चाहिए? ...और पढ़ें

लोहे का छल्ला पहनने के नियम (AI Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को क्रूर ग्रह का दर्जा प्राप्त है, जो न्याय और कर्मफल प्रदान देवता हैं। ज्योतिष के असल जानकारों की माने तो शनि से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वो सजा देने नहीं, बल्कि जीवन में बेहतर बदलाव लाने के लिए कष्ट देते हैं।
आमतौर पर लोग शनि की ढैय्या, साढ़ेसाती, दशा और महादशा से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए हाथ में लोहे का छल्ला पहनते हैं। रत्न शास्त्र में सभी नव ग्रहों के लिए अलग-अलग तरह की अंगूठी निर्धारित की गई हैं, ठीक उसी तरह शनिदेव के लिए भी तीन तरह की अंगूठी होती है।
जिसमें पहला नीलम की अंगूठी, दूसरा लोहे की अंगूठी और तीसरा घोड़े की नाल की अंगूठी है। लोहे का छल्ला या अंगूठी को शनि छल्ला के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं लाल किताब के अनुसार लोहे की अंगूठी पहनने के नियमों के बारे में।
लोहे का छल्ला किसे पहनना चाहिए?
लाल किताब के अनुसार कभी भी कुंडली की जांच करने के बाद ही लोहे का छल्ला पहनना चाहिए वरना इसके नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। जब कुंडली में सूर्य, शुक्र और बुध एक ही घर साझा करें तो शुद्ध चांदी का छल्ला पहनना चाहिए। ऐसे में लोहे का छल्ला पहनने से नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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बुध अगर 12वें भाव में हो या बुध एवं राहु एक साथ या अलग-अलग भाव में मंद हो रहे हों, तो यह छल्ला चेन में डालकर गले में धारण करना चाहिए, हाथ में पहनने से नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
कुंडली का 12वां भाव राहु का माना जाता है। शुद्ध लोहे का छल्ला बुध और शनि दोनों ग्रहों का मिला-जुला रूप है। कुंडली में जब सूर्य, शुक्र और बुध एक साथ हो तो लोहे का छल्ला पहनने से बचना चाहिए।
शनि छल्ला कब और किस उंगली में पहनें?
इसके अलावा जिस किसी जातक की कुंडली में शनि उच्च भाव में रहकर उत्तम फल दे रहा हो, उसे भी यह शनि छल्ला नहीं पहनना चाहिए। इसे हमेशा दाहिने हाथ की माध्यम उंगली में पहनना चाहिए, क्योंकि इसी उंगली के नीचे शनि पर्वत होता है।
शनि छल्ला धारण करने के लिए सबसे शुभ दिन शनिवार का है। इसके लिए पुष्य, अनुराधा, उत्तरा, भाद्रपद एवं रोहिणी नक्षत्र सबसे उत्तम है। इसके अलावा अगर आपने शनि छल्ला धारण कर रखा है, तो इस छल्ले को समय-समय पर बालू से चमकाते रहे, ताकि इसकी चमक बने रहे।
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